
देवघर: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), देवघर का पहला दीक्षांत समारोह 31 जुलाई को आयोजित होगा. इस ऐतिहासिक मौके की मुख्य अतिथि भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू होंगी. राष्ट्रपति 2019 बैच के 48 छात्र-छात्राओं को एमबीबीएस की डिग्री प्रदान करेंगी.
समारोह में एम्स देवघर के अध्यक्ष प्रो. (डॉ.) एनके अरोड़ा कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे. झारखंड के राज्यपाल संतोष गंगवार, राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी, संस्थान की निकाय सदस्य पायल बंसल, स्थानीय विधायक सुरेश पासवान, पूर्व विधायक नारायण दास समेत केंद्र और राज्य के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहेंगे.
कार्यक्रम की शुरुआत स्वागत भाषण से होगी जिसे प्रो. अरोड़ा देंगे. इसके बाद कार्यकारी निदेशक डॉ. सौरभ वार्ष्णेय संस्थान की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे. डॉ. वार्ष्णेय ने बताया कि यह समारोह केवल एक शैक्षणिक आयोजन नहीं, बल्कि देश को समर्पित भावी चिकित्सकों के उत्साह और समर्पण का उत्सव भी है. आयोजन की सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं और इसे गरिमामय बनाने के लिए अलग-अलग समितियां बनाई गई हैं.
समारोह में तीन मेधावी छात्रों को स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक से नवाजा जाएगा. एक छात्र को उत्कृष्ट उपस्थिति के लिए विशेष पदक मिलेगा. दीक्षांत के बाद सभी उत्तीर्ण छात्रों और संकाय सदस्यों के साथ राष्ट्रपति की ग्रुप फोटोग्राफी भी होगी. इसके बाद झारखंड के कलाकारों द्वारा पारंपरिक लोकनृत्य से राष्ट्रपति का स्वागत किया जाएगा.
वर्तमान में एम्स देवघर में विभिन्न बैचों के एमबीबीएस छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं. 2020 बैच के 62 छात्र इंटर्नशिप कर रहे हैं, जबकि 2021, 2022, 2023 और 2024 बैचों में 100 से अधिक छात्र प्रति वर्ष दाखिला ले चुके हैं. बीएससी नर्सिंग, एमडी, एमएस, एमसीएच, डीएम और एमएससी नर्सिंग समेत पारा मेडिकल पाठ्यक्रमों में भी सैकड़ों छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं.
एम्स देवघर अगस्त 2025 से देश का पहला ऐसा एम्स बन जाएगा जहां पब्लिक हेल्थ में स्नातक और परास्नातक दोनों कोर्स शुरू किए जाएंगे. इसकी कुल 10 सीटें निर्धारित हैं.
इस समारोह में रिखिया आश्रम की पीठाधीश्वर स्वामी सत्यसंगानंद, स्वामी सूर्य प्रकाश, स्वामी शंकरानंद, आरके मिशन के प्राचार्य, एम्स दिल्ली और भुवनेश्वर के वरिष्ठ अधिकारी, एलआईसी, सत्संग आश्रम और अन्य संस्थानों के प्रतिनिधि भी आमंत्रित हैं.
यह आयोजन न केवल देवघर बल्कि पूरे झारखंड के लिए गौरव का क्षण होगा, जहां चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में एक नया इतिहास रचा जा रहा है.
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