
रांची: मराठी और हिंदी भाषा विवाद अब केवल भाषाई बहस न रहकर खुली राजनीतिक लड़ाई का रूप ले चुका है. महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे और भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के बीच बयानबाज़ी ने इस मुद्दे को सियासी गर्मी की नई ऊंचाइयों तक पहुंचा दिया है.
कहां से शुरू हुआ विवाद?
यह पूरा विवाद एक साधारण से दुकानदार को मराठी न बोल पाने की वजह से MNS कार्यकर्ताओं द्वारा पीटे जाने से शुरू हुआ. घटना के बाद भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने झारखंड के गोड्डा से तल्ख़ टिप्पणी करते हुए कहा था—
“अगर हिम्मत है तो महाराष्ट्र में उर्दू बोलने वालों के खिलाफ बोलकर दिखाओ. हिंदी का विरोध करने वालों को पटक-पटक कर मारेंगे.”
दुबे ने ठाकरे परिवार पर हमला बोलते हुए यह भी कहा, “अपने घर में तो कुत्ता भी शेर होता है.”
कुछ दिनों बाद राज ठाकरे ने दुबे के बयान पर भड़कते हुए जवाब दिया— “तू हमें मारेगा दुबे? तू मुंबई आजा, तुझे समंदर में डुबा-डुबा कर मारेंगे.”
ठाकरे ने यह भी पूछा, “क्या दुबे पर कोई केस हुआ? तुम 56 इंच की छाती लेकर घूमते हो?”
साथ ही उन्होंने चेतावनी दी— “मराठी का अपमान हुआ तो गाल और हाथ की युति जरूर होगी.”
इस बयान के साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति में बयानबाज़ी का पारा और चढ़ गया.
राज ठाकरे के इस हमलावर जवाब के बाद निशिकांत दुबे ने एक बार फिर एक्स (पूर्व ट्विटर) पर जवाब देते हुए ठाकरे का वही वीडियो साझा किया और
व्यंग्यात्मक अंदाज़ में लिखा— “मैंने राज ठाकरे को हिंदी सिखा दी?”
हालांकि, दुबे ने अब तक इस मसले पर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया है.
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