
नई दिल्ली: केंद्र सरकार बुधवार को लोकसभा में तीन अहम बिल पेश करने जा रही है। इन बिलों के जरिए पहली बार ऐसा प्रावधान किया जाएगा कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या किसी मंत्री को किसी गंभीर आपराधिक मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है, तो उन्हें पद से हटाया जा सकेगा।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह लोकसभा में इन तीनों बिलों को पेश करेंगे। इनमें गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025, 130वां संविधान संशोधन बिल 2025 और जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025 शामिल हैं।
क्या है नया प्रावधान?
बिल में यह साफ किया गया है कि अगर प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या कोई मंत्री गंभीर अपराध में दोषी पाए जाते हैं और उन्हें 5 साल की सजा सुनाई जाती है, तो गिरफ्तारी के 31वें दिन उन्हें पद से हटाया जा सकेगा। अभी तक इस तरह का कोई स्पष्ट कानून मौजूद नहीं था।
गवर्नमेंट ऑफ यूनियन टेरिटरीज (संशोधन) बिल 2025
1963 के केंद्र शासित प्रदेश सरकार अधिनियम में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है, जिसमें गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार सीएम या मंत्री को हटाया जा सके। नए संशोधन के बाद इस कमी को दूर किया जाएगा।
130वां संविधान संशोधन बिल 2025
इस संशोधन के तहत संविधान के अनुच्छेद 75, 164 और 239एए में बदलाव होगा। इसका मकसद प्रधानमंत्री, केंद्रीय मंत्री, राज्यों और दिल्ली के मुख्यमंत्री व मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तारी की स्थिति में हटाने का कानूनी ढांचा तैयार करना है।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) बिल 2025
2019 के जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में भी ऐसा कोई प्रावधान नहीं है। प्रस्तावित संशोधन के जरिए जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री और मंत्रियों पर भी वही नियम लागू होंगे।
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