
देवघर: एसपी माइंस चितरा कोलियरी के विस्तार को लेकर उपायुक्त नमन प्रियेश लकड़ा की अध्यक्षता में समाहरणालय सभागार में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई. इसमें राजस्व वृद्धि, खनन प्रबंधन और पर्यावरणीय संतुलन से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा की गई.
बैठक में डीसी ने चितरा कोलियरी के महाप्रबंधक को निर्देश दिया कि खदान के अंदर से निकलने वाली सड़क को बाहर से बनाए जाने की प्रक्रिया को शीघ्र प्रारंभ किया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि इस मार्ग से न केवल ट्रांसपोर्ट व्यवस्था बेहतर होगी, बल्कि सुरक्षा जोखिम भी कम होंगे.
डीसी ने ईसीएल के अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिग्रहण की जाने वाली जमीन की प्रकृति की स्पष्ट जानकारी एकत्र की जाए. यह जांच हो कि जमीन गोचर है, रैयती है या सरकारी. वन विभाग के अधीन आने वाली जमीनों के लिए संबंधित अंचलाधिकारी और वन प्रमंडल पदाधिकारी से समन्वय कर ‘नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट’ प्राप्त किया जाए.
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डीसी ने खनन क्षेत्र में अवैध उत्खनन और ओवरलोडिंग पर रोक लगाने का निर्देश दिया. साथ ही यह भी सुनिश्चित करने को कहा गया कि केवल वैध फिटनेस प्रमाणपत्र वाले वाहनों से ही कोयले की ढुलाई की जाए. अनियमित ढुलाई से क्षेत्रीय सड़कों और सुरक्षा व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है.
जहां-जहां खनन का कार्य समाप्त हो चुका है, वहां भूमि को भरने और पुनर्स्थापित करने की प्रक्रिया आरंभ करने का निर्देश भी डीसी ने अधिकारियों को दिया. यह कदम न केवल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में सहायक होगा, बल्कि भविष्य में भूमि उपयोग की संभावनाएं भी खोलेगा.
बैठक में यह भी सामने आया कि डंप (अपशिष्ट सामग्री) के अनुचित जमाव से ट्रांसपोर्ट व्यवस्था प्रभावित हो रही है. डीसी ने कहा कि अगर डंप प्रबंधन समय रहते नहीं सुधारा गया, तो न केवल उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि पर्यावरणीय क्षति भी होगी.
बैठक में अपर समाहर्ता हीरा कुमार, एसपी माइंस चितरा कोलियरी के महाप्रबंधक समेत चितरा कोल माइंस के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे. बैठक समन्वय, पारदर्शिता और प्रभावी कार्यप्रणाली की दिशा में एक अहम प्रयास साबित हुआ.
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