
गम्हरिया: टायो गेट स्थित संथाल सरना उमूल में रविवार को बोड़ो पीड़ पारगाना महाल की बैठक पारगाना राजेश टुडू की अध्यक्षता में आयोजित हुई. बैठक में लगभग 70 गांवों के माझी बाबा और समाज के प्रतिनिधियों ने भाग लिया.
बैठक में पारंपरिक सामाजिक स्वशासन व्यवस्था को सुदृढ़ करने, रूढ़ीवादी प्रथाओं पर पुनर्विचार करने और समाज को आधुनिकता के साथ संतुलन में ढालने को लेकर विचार हुआ. पारगाना राजेश टुडू ने कहा कि आदिवासी समाज के युवा अपनी संस्कृति से दूर होते जा रहे हैं, जिसे रोकना आवश्यक है.
राजेश टुडू ने घोषणा की कि जल्द ही पंचायत कला-संस्कृति भवन में एक संस्कृति केंद्र खोला जाएगा. इसमें आदिवासी वाद्य यंत्रों, परंपरागत वस्त्रों, शिल्पकला और सांस्कृतिक प्रतीकों को संग्रहित किया जाएगा. इसका उद्देश्य युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना और सांस्कृतिक पहचान को पुनर्जीवित करना है.
बैठक में निर्णय लिया गया कि समाज के बच्चों को शिक्षित करने के साथ-साथ ओलचिकी लिपि को लेकर भी जनजागरूकता अभियान चलाया जाएगा. यह पहल आदिवासी भाषा और लिपि के संरक्षण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम होगा.
नौ अगस्त को विश्व आदिवासी दिवस को धूमधाम और गरिमा के साथ मनाने का निर्णय लिया गया. इस अवसर पर सांस्कृतिक कार्यक्रमों, जनसभा और विचार गोष्ठियों का आयोजन किया जाएगा.
36 सदस्यीय संचालन टीम गठित
समाज की स्वशासन व्यवस्था के प्रभावी संचालन के लिए 36 सदस्यीय टीम का गठन किया गया. इसमें शामिल हैं:
12 माझी बाबा
12 बुद्धिजीवी सदस्य
12 शिक्षित युवा
यह टीम सामाजिक मुद्दों, निर्णय प्रक्रिया और युवा भागीदारी में सक्रिय भूमिका निभाएगी.
बैठक में प्रमुख रूप से बिराम माझी, सोखेन हेंब्रम, कारजी लश्कर टुडू, जोगेंद्र मार्डी, देव मार्डी, भागवत बास्के, सुकराम टुडू, सुरेंद्र टुडू, भोजो मार्डी सहित अनेक गांवों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
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