
जमशेदपुर: हरियाली तीज हिन्दू धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए एक पवित्र व्रत है, जो भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन की स्मृति में मनाया जाता है. यह पर्व दांपत्य जीवन में प्रेम, सौहार्द और पति की दीर्घायु की कामना के साथ जुड़ा है. इस बार यह तीज और भी खास है क्योंकि इसमें ‘रवि योग’ बन रहा है, जो इसे और अधिक शुभ और फलदायी बनाता है.
कब है हरियाली तीज? जानें शुभ मुहूर्त
तिथि प्रारंभ: 26 जुलाई, शनिवार रात 10:41 बजे
तिथि समाप्ति: 27 जुलाई, रविवार रात 10:41 बजे
पूजा तिथि (उदयकाल के अनुसार): 27 जुलाई, रविवार
यदि आप पहली बार यह व्रत रख रही हैं, तो सही समय, विधि और नियमों का पालन करना जरूरी है ताकि व्रत का संपूर्ण फल प्राप्त हो.
मां पार्वती का श्रृंगार: पूजा का एक अहम हिस्सा
पूजा के दौरान माता पार्वती को सौभाग्य सामग्री अर्पित करना जरूरी माना जाता है. इसमें ये वस्तुएं शामिल करें:
हरी साड़ी या हरी-लाल चुनरी
चूड़ियां, बिंदी, सिंदूर, कंघी, बिछुआ
काजल, कुमकुम, मेहंदी, दर्पण और इत्र
यह श्रृंगार माता के सम्मान और आशीर्वाद प्राप्ति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है.
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व्रत और पूजा की विधि: कैसे करें शुरुआत?
सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र पहनें.
पूजा स्थल की सफाई करें. गोबर से लेपन और गंगाजल से शुद्धिकरण करें.
घी का दीपक जलाकर व्रत का संकल्प लें – निर्जला या फलाहारी व्रत.
सुहागिन महिलाएं 16 श्रृंगार करें. हरे रंग को विशेष स्थान दें.
माता पार्वती और भगवान शिव की मिट्टी या बालू से बनी मूर्ति या चित्र रखें.
शिव-पार्वती का आवाहन कर पूजा आरंभ करें.
शिवजी का अभिषेक गंगाजल और पंचामृत से करें.
माता को श्रृंगार सामग्री अर्पित करें.
बेलपत्र, धतूरा, अक्षत, सुपारी, चंदन, फल-फूल और नैवेद्य अर्पित करें.
हरियाली तीज की व्रत कथा श्रद्धा से पढ़ें.
अंत में आरती और प्रार्थना करें.
अगले दिन पूजन सामग्री और प्रतिमा को बहते जल में विसर्जित करें.
हरियाली तीज के नियम: क्या करें, क्या न करें?
यह व्रत निर्जला रखा जाता है. जरूरत हो तो फलाहार का विकल्प लिया जा सकता है.
हरे रंग का विशेष महत्व है, इसे श्रृंगार और वस्त्रों में जरूर शामिल करें.
हाथों में मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है.
पूरे दिन संयम और भक्ति बनाए रखें.
किसी भी प्रकार के झगड़े या विवाद से दूर रहें.
सच्चे मन से भगवान शिव-पार्वती की आराधना करें.
हरियाली तीज केवल धार्मिक पर्व नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से भी महिलाओं के जीवन में विशेष स्थान रखता है. मान्यता है कि मां पार्वती ने कठोर तपस्या कर भगवान शिव को पति रूप में प्राप्त किया था. सुहागिन महिलाएं इस दिन अपने पति की लंबी उम्र और वैवाहिक जीवन में प्रेम व स्थायित्व की प्रार्थना करती हैं. यह पर्व संतान सुख, सौभाग्य और पारिवारिक समृद्धि का प्रतीक भी माना जाता है.
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