
रांची: हरतालिका तीज का व्रत सुहागिन महिलाओं के लिए बेहद पावन और शुभ माना जाता है। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करके पति की लंबी उम्र और अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। इसे कठिन व्रतों में गिना जाता है क्योंकि महिलाएं इस दिन निर्जला उपवास करती हैं।
सरगी का महत्व
हरतालिका तीज व्रत की शुरुआत सरगी से होती है। इसे व्रत की पहली आहुति और प्रसाद माना जाता है। सरगी में मौसमी फल, मेवे, मिठाई, खीर, नारियल पानी या जूस ले सकते हैं। नमकयुक्त भोजन से बचना चाहिए। सरगी से पहले महिलाओं को स्नान करके भगवान के समक्ष व्रत का संकल्प लेना चाहिए।
सरगी का शुभ समय
इस साल हरतालिका तीज के लिए ब्रह्म मुहूर्त को सबसे शुभ माना गया है।
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:27 से 5:12 बजे तक
यानी, सूर्योदय से पहले इसी समय पर सरगी ग्रहण करना सर्वोत्तम रहेगा।
व्रत और पारण
तीज का व्रत निर्जला रखा जाता है और इसका पारण अगले दिन चतुर्थी तिथि पर सूर्योदय के बाद किया जाता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हरतालिका तीज भगवान शिव और माता पार्वती के मिलन का प्रतीक है। इस दिन महिलाएं मिट्टी से शिव-पार्वती की प्रतिमा बनाकर पूजन करती हैं और दांपत्य जीवन में सुख, विश्वास और प्रेम की कामना करती हैं।
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