
रांची: मनरेगा घोटाले में चार्जशीट दाखिल करने के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब IAS पूजा सिंघल पर मुकदमा चलाने की स्वीकृति का इंतजार कर रही है. करीब 120 दिन पहले ईडी ने राज्य सरकार से अभियोजन स्वीकृति मांगी थी, लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं मिला.
अब एजेंसी ने अदालत में नई याचिका दाखिल की है जिसमें सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय का हवाला देकर यह कहा गया है कि सरकार की चुप्पी को ‘डीम्ड सैंक्शन’ यानी स्वीकृति माना जाए और मुकदमे की सुनवाई शुरू की जाए.
सुप्रीम कोर्ट के आदेश का दिया गया हवाला
नवंबर 2024 में आए एक अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने मनी लॉन्ड्रिंग जैसे मामलों में सरकारी अधिकारियों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति को अनिवार्य बताया था.
ED ने इसी आधार पर पूजा सिंघल के खिलाफ राज्य सरकार से स्वीकृति मांगी थी. अब ईडी का कहना है कि चूंकि 120 दिन तक कोई प्रतिक्रिया नहीं आई, इसलिए सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार इसे स्वीकृति मान लिया जाना चाहिए.
यह भी उल्लेखनीय है कि इससे पहले अरुण सिंह से जुड़े अवैध खनन मामले में अभियोजन स्वीकृति नहीं मिलने पर अदालत ने स्वतः संज्ञान लेते हुए सुनवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ाई थी.
सूचना एवं प्रोद्योगिकी विभाग में तैनात हैं पूजा सिंघल
पूजा सिंघल को 12 मई 2022 को ED ने मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में गिरफ्तार किया था. उस समय वे खान विभाग की सचिव थीं. गिरफ्तारी के बाद राज्य सरकार ने उन्हें निलंबित कर दिया था.
7 दिसंबर 2024 को PMLA कोर्ट से ज़मानत मिलने पर जेल से रिहा होने के बाद सरकार ने उनका निलंबन समाप्त कर दिया. इसके बाद उन्होंने कार्मिक विभाग में योगदान दिया और फिर उन्हें सूचना एवं प्रोद्योगिकी विभाग का सचिव बनाया गया.
हाईकोर्ट ने खारिज की PIL
मनरेगा घोटाले में IAS पूजा सिंघल के खिलाफ दायर एक जनहित याचिका (PIL) को झारखंड हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है. यह याचिका अरुण कुमार दुबे ने दाखिल की थी, जिसमें जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे.
पूर्व में सुनवाई के दौरान तत्कालीन चीफ जस्टिस संजय कुमार मिश्र और जस्टिस आनंदा सेन की खंडपीठ ने याचिकाकर्ता और उनके वकील की प्रमाणिकता को संदिग्ध मानते हुए उन्हें मामले से हटाने का आदेश दिया था. कोर्ट ने स्वतः संज्ञान लेते हुए एमिकस क्यूरी की नियुक्ति की और मामला किसी सक्षम पीठ को सौंपा. अंततः याचिका को आज खारिज कर दिया गया.
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