
जमशेदपुर: हिंदू धर्म की रक्षा के लिए वर्ष 1675 में दिल्ली के चांदनी चौक पर शहादत देने वाले गुरु तेग बहादुर जी और उनके तीन शिष्य—भाई सती दास, भाई मती दास और भाई दयाला जी की याद में निकले शहीदी नगर कीर्तन का स्वागत पूरे शहरवासियों से करने की अपील की गई है। कॉमी सिख मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अधिवक्ता कुलबिंदर सिंह ने कहा कि यह अवसर धर्म और जाति से ऊपर उठकर सभी को एकजुट करता है।
कुलबिंदर सिंह ने शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) के अध्यक्ष अधिवक्ता हरजिंदर सिंह धामी का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि ऐतिहासिक स्थान न होते हुए भी जमशेदपुर और रांची को इस नगर कीर्तन का हिस्सा बनाया गया, जबकि पहले तय था कि नगर कीर्तन केवल उन्हीं स्थलों से गुजरेगा जहां से गुरु तेग बहादुर जी असम से आनंदपुर साहिब गए थे।
कुलबिंदर सिंह ने कहा कि औरंगजेब भारत को इस्लामिक राष्ट्र बनाना चाहता था और कश्मीरी पंडितों की रक्षा के लिए गुरु तेग बहादुर जी ने अपने तीन शिष्यों संग शहादत देकर उसकी मंशा पर पानी फेर दिया। यदि गुरुजी इस्लाम स्वीकार कर लेते तो कश्मीरी पंडितों को भी धर्म बदलना पड़ता, लेकिन उन्होंने हिंद की चादर बनकर धर्म और मानवता की रक्षा की।
उन्होंने कहा कि आज भारत लोकतांत्रिक देश है, जहां संविधान का राज है और हर धर्म, जाति, भाषा व विचारधारा के अधिकार सुरक्षित हैं। यह सब संभव हुआ है गुरु तेग बहादुर जैसे संतों के बलिदान की वजह से, जिसे हमें हर हाल में याद और बरकरार रखना चाहिए।
कुलबिंदर सिंह ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा अध्यक्ष जे. पी. नड्डा को धन्यवाद दिया कि सरकार के स्तर पर गुरु तेग बहादुर जी की शहादत से जुड़े कई कार्यक्रम देशभर में आयोजित किए जा रहे हैं।
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