
रामगढ़: पूर्व मुख्यमंत्री और राज्यसभा सांसद दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को गहरे दुख में डाल दिया है। फिर भी वे अपने पैतृक गांव नेमरा से ही राज्य के कामकाज संभाल रहे हैं। परंपरागत विधियों से पिता के अंतिम संस्कार की रस्म निभाने के साथ-साथ जरूरी सरकारी फाइलों का निपटारा भी कर रहे हैं।
राज्यहित में सक्रिय
गहरे शोक के बीच भी सीएम वरीय अधिकारियों से लगातार संवाद कर रहे हैं और सरकारी कामों की समीक्षा कर रहे हैं। उन्होंने निर्देश दिया है कि जनता की समस्याओं का तत्काल समाधान हो और किसी भी काम में लापरवाही न हो। शुक्रवार को अपर प्रधान मुख्य सचिव अविनाश कुमार जरूरी फाइलें लेकर नेमरा पहुंचे, जिन पर सीएम ने तुरंत निर्णय लिए।
जनता से मिली हिम्मत
सीएम ने कहा कि राज्य की जनता के सहयोग और संवेदना ने उन्हें अपने कर्तव्य निभाने की ताकत दी है। उन्होंने याद किया कि “बाबा हमेशा कहते थे कि जनता के लिए खड़ा रहना ही सार्वजनिक जीवन का धर्म है।” उन्होंने यह भी कहा कि शिबू सोरेन ने व्यक्तिगत हितों से ऊपर उठकर झारखंड के अधिकार और पहचान के लिए संसद से लेकर सड़क तक संघर्ष किया।
वादों को निभाने का संकल्प
मुख्यमंत्री ने दोहराया कि बाबा ने राज्य के भविष्य को लेकर उनसे जो वचन लिए थे, उन्हें हर हाल में पूरा करेंगे। विधानसभा अध्यक्ष रबींद्र नाथ महतो भी नेमरा पहुंचे और शिबू सोरेन को श्रद्धांजलि दी। धार्मिक परंपरा के अनुसार, सीएम ने बाबा को भोजन परोसने की रस्म भी निभाई।
किसानों के बीच पहुंचे
शुक्रवार को सीएम ने गांव में धनरोपनी कर रहे किसानों और महिलाओं से मुलाकात की। उनकी समस्याएं सुनीं और भरोसा दिया कि किसानों का कल्याण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने ग्रामीणों को सरकारी योजनाओं से जुड़कर आत्मनिर्भर बनने का आग्रह किया।
इसे भी पढ़ें : Train Accident: मालगाड़ी हादसे से ट्रेन सेवाएं प्रभावित, वंदे भारत समेत 30 से अधिक ट्रेनें रद्द