
धनबाद: पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह हत्याकांड में आखिरकार अदालत ने अपना फैसला सुना दिया। आठ साल तक चले मुकदमे, 408 तारीखों की सुनवाई और सैकड़ों गवाहियों के बाद बुधवार 27 अगस्त 2025 को धनबाद के व्यवहार न्यायालय ने सभी आरोपियों को बरी कर दिया। इनमें झरिया के पूर्व विधायक संजीव सिंह भी शामिल हैं।
कोर्ट का फैसला
सुनवाई के दौरान संजीव सिंह को स्ट्रेचर पर एंबुलेंस से कोर्ट लाया गया। फैसला सुनाए जाने से पहले वकीलों और पुलिस के बीच थोड़ी नोकझोंक भी हुई, लेकिन बाद में माहौल शांत हो गया। जज ने साफ किया कि नीरज सिंह हत्याकांड में पेश किए गए सबूत आरोप साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं।
प्रशासन की सख्त तैयारी
फैसले के दिन शहर में तनाव की आशंका के चलते जिला प्रशासन ने रणधीर वर्मा चौक से लेकर डीआरएम चौक तक धारा 144 लागू कर दी थी। सुबह 6 बजे से रात 10 बजे तक पांच या उससे अधिक लोगों के जुटने, रैली-धरना और हथियार लेकर चलने पर प्रतिबंध रहा। सुरक्षा के लिए JAP के जवानों की तैनाती की गई और पुलिस गश्त बढ़ा दी गई।
आठ साल की कानूनी जंग
21 मार्च 2017 को सरायढेला स्टीलगेट पर हुए शूटआउट में नीरज सिंह, उनके पीए अशोक यादव, बॉडीगार्ड मुन्ना तिवारी और ड्राइवर घल्टू महतो की हत्या हुई थी।
पुलिस ने संजीव सिंह समेत 12 लोगों के खिलाफ चार्जशीट दायर की थी।
मामले की सुनवाई 6 अलग-अलग कोर्ट में चली और आठ साल तक खिंचती रही।
74 गवाहों में से 37 ने गवाही दी, वहीं बचाव पक्ष की ओर से 5 गवाह पेश किए गए।
इस दौरान 3 दिसंबर 2023 को आरोपी अमन सिंह की जेल में हत्या कर दी गई।
कोर्ट ने यूपी और बिहार से जुड़े शूटरों और झरिया के स्थानीय आरोपियों सहित सभी 10 लोगों को बरी कर दिया। एक आरोपी का ट्रायल अलग से जारी रहेगा।
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