
झाड़ग्राम: JSM का यह अभियान आने वाले दो वर्षों (8 अगस्त 2025 से 7 अगस्त 2027) तक देशभर में चलेगा। इसे “स्वराज संवाद” के नाम से पूरे देश में चलाया जाएगा। इसका मकसद है – जनता के बीच जाकर नए भारत की राजनीतिक दिशा पर संवाद शुरू करना, और एक ऐसा मंच तैयार करना जो सबकी बात को, सबके बीच ले जा सके।
JSM ने 8 अगस्त 2022 को संविधान आधारित “स्वराज” के विचार के साथ अपने सफर की शुरुआत की थी। अब, तीन साल बाद, यह विचार सिर्फ एक संगठन नहीं, बल्कि एक जनआंदोलन की शक्ल ले रहा है। इसका मकसद साफ है — हर नागरिक को बराबरी का अधिकार, गरिमा और विकास में भागीदारी। JSM का मानना है कि “सशक्त नागरिक ही भारत की असली ताकत हैं” और भारत का भविष्य संविधान आधारित स्वराज में ही है।
JSM ने अपने घोषणापत्र में कई जरूरी मुद्दों को प्राथमिकता दी है —
शिक्षा, स्वास्थ्य, रोज़गार, महिला सुरक्षा, सामाजिक न्याय, किसानों के अधिकार, पर्यावरण, और भ्रष्टाचार-मुक्त शासन जैसी बुनियादी ज़रूरतों को लेकर गंभीर वादे किए गए हैं।
साथ ही, आदिवासी भाषाओं और संस्कृति की रक्षा, पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य-शिक्षा का मजबूत ढांचा, और क्षेत्रीय विकास के लिए विशेष आर्थिक पैकेज की बात भी प्रमुखता से की गई है।
JSM के केंद्रीय अध्यक्ष अशोक महतो ने इस अवसर पर कहा: “सच्चा स्वराज तब मिलेगा जब हर व्यक्ति को उसका सम्मान और अधिकार मिले। हमारा आंदोलन जंगलमहल तक सीमित नहीं रहेगा — यह देश के हर गांव, हर शहर तक पहुंचेगा। हमारा रास्ता है संविधान का रास्ता, और जनता ही इस बदलाव की असली ताकत है।”
उन्होंने सभी जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे “स्वराज संवाद” में शामिल हों और एक नए, भरोसेमंद राजनीतिक विकल्प के निर्माण में सक्रिय भागीदारी निभाएं।
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