
जमशेदपुर: झारखंड सरकार के मंत्री रामदास सोरेन के निधन की खबर मिलते ही घोड़ाबांधा क्षेत्र में गहरा शोक फैल गया। पूरे गांव में माहौल गमगीन रहा और उनकी स्मृति में सभी दुकानें बंद रहीं। सामाजिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी पूरी तरह ठप हो गईं।
ग्रामीणों ने बताया अभिभावक जैसा व्यक्तित्व
गांव के लोगों ने दुख व्यक्त करते हुए कहा कि रामदास सोरेन सिर्फ मंत्री नहीं, बल्कि अभिभावक जैसे थे। जब भी किसी ग्रामीण को कोई दिक्कत होती, वे सीधे उनसे मिलते और अपनी परेशानी बताते। वे तुरंत समाधान निकालते थे।
गरीबों के लिए सहारा बने
रामदास सोरेन हमेशा गरीब और असहाय लोगों की मदद के लिए तैयार रहते थे। वे न सिर्फ समस्याओं को हल करते, बल्कि आर्थिक रूप से भी जरूरतमंदों का सहयोग करते थे। ग्रामीणों का कहना है कि उनका जाना ऐसा है, मानो गांव ने अपना अभिभावक खो दिया हो।
यादों में रहेंगे उनके कार्य
लोगों के बीच उनकी यादें और योगदान चर्चा का विषय बने रहे। क्षेत्र में उनके प्रभाव और लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि उनके निधन पर पूरा इलाका ठहर गया।
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