Kanpur : फुटपाथ पर दुकान लगाकर बेचने वाले 250 से अधिक लोग बने करोड़पति

आयकर विभाग की जांच में हुआ चौकाने वाला खुलासा

कानपुर : आयकर विभाग ने एक चौकाने वाला खुलासा किया. उत्तर प्रदेश के कानपुर में फुटपाथ पर ठेले या खोमचे लगाकर पान मसाला, चाट, समोसा और खस्ता जैसे छोटे-मोटे सामान बेचने वाले 250 से अधिक लोग करोड़पति की सूची में शामिल हुए हैं. यह जानकारी आयकर विभाग और जीएसटी जांच के दौरान सामने आई, जिसने इन सड़क व्यापारियों की वास्तविक आर्थिक स्थिति को उजागर किया. 2021 में आयकर विभाग ने बिग डेटा सॉफ्टवेयर और जीएसटी रजिस्ट्रेशन के आधार पर कानपुर में एक व्यापक जांच शुरू की. इस जांच में कुल 256 ऐसे सड़क विक्रेता सामने आए, जो देखने में साधारण लगते थे, लेकिन उनकी संपत्ति करोड़ों रुपये की थी. इनमें से अधिकांश पान मसाला, चाट, समोसा, खस्ता और फल बेचने वाले थे. इसके अलावा कुछ कबाड़ी, छोटे किराना दुकानदार और दवा व्यापारी भी इस सूची में शामिल हैं.  इन व्यापारियों ने पिछले चार साल में 375 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी. ये संपत्तियां कानपुर के पॉश इलाकों जैसे आर्यनगर, स्वरूप नगर, बिरहाना रोड, हूलागंज, पीरोड और गुमटी में स्थित हैं. कई ने दक्षिण कानपुर में रिहायशी जमीनें और 650 बीघा कृषि जमीन भी खरीदी, जो कानपुर देहात, बिठूर, मंधना, बिल्हौर और फर्रुखाबाद तक फैली हुई हैं.

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कबाड़ियों की संपत्ति

लाल बंगला और बेकनगंज के कबाड़ियों के पास भी करोड़ों की संपत्ति मिली. कुछ के पास तो तीन-तीन कारें और 10 करोड़ से अधिक की प्रॉपर्टी है. कुछ मामलों में तो यह भी पता चला कि बिरहाना रोड और स्वरूप नगर के पान दुकानदारों ने कोरोना महामारी के दौरान 5 करोड़ रुपये की संपत्ति खरीदी. मालरोड का एक खस्ता विक्रेता हर महीने 1.25 लाख रुपये किराया देते मिला.

टैक्स चोरी का खेल

हैरानी की बात यह है कि इनमें से अधिकांश विक्रेताओं ने न तो आयकर भरा और न ही जीएसटी रजिस्ट्रेशन कराया. विभाग के अनुसार, ये लोग अपनी कमाई को छिपाने के लिए चालाकी का सहारा लेते थे. कई ने सहकारी बैंकों और स्मॉल फाइनेंस बैंकों में खाते खोले, जबकि संपत्ति अपने रिश्तेदारों-जैसे भाई, भाभी, चाचा या बहन के नाम पर खरीदी. हालांकि, पैन कार्ड और आधार के जरिए इनकी सच्चाई सामने आईआयकर विभाग लंबे समय से ऐसे छिपे हुए धन्नासेठों पर नजर रख रहा था. जांच में आधुनिक तकनीक और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल किया गया. अधिकारियों का कहना है कि ये लोग गरीबी का दिखावा करते थे, लेकिन उनकी जीवनशैली और संपत्ति उनकी असली कहानी बयान करती है.

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