साकची में किराए का मकान लेकर रह रहा था लुधियाना का अमरिंदर सिंह, कारोबारी की हर गतिविधि पर रखी नजर
जमशेदपुर : बिष्टुपुर सीएच एरिया निवासी कारोबारी देवांग गांधी के पुत्र कैरव गांधी के अपहरण के मामले में पुलिस ने पूरे गैंग के लोगों को पकड़ने में कामयाबी हासिल की है. पुलिस ने मुख्य साजिशकर्ता के सहयोगी साजिकत्ता पंजाब के लुधियाना निवासी अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह को गिरफ्तार किया है. वहीं, इस अपहरण की घटना को अंजाम देने में सहयोगी रहे पंजाब के लुधियाना के रहने वाले मनप्रीत सिंह सेखो, बिहार के शेखपुरा निवासी राजकरण यादव, पंजाब के लुधियाना निवासी गुरदीत शेर सिंह और बिहार के शेखपुरा निवासी संतोष कुमार उर्फ संतोष विल्लेन को गिरफ्तार किया है. गौरतलब है कि कैरव गांधी का 13 जनवरी को कदमा सोनारी लिंक रोड से अपहरण कर लिया गया था.
इस कांड के करीब 13 दिनों के बाद 26 व 27 जनवरी की मध्य रात्रि को कैरव गांधी को सकुशल बरामद किया गया था. इस मामले में सबसे पहले पुलिस ने गुड्ड सिंह, उपेंद्र सिंह, अर्जुन सिंह उर्फ आर्यन, मोहम्मद इमरान आलम उर्फ आमीर, रमीज राजा और मोहन कुमार प्रसाद को गिरफ्तार किया था. इस मामले का अनुसंधान के दौरान पुलिस को पता चला कि इस अपहरणकांड के साजिशकर्ता में से एक अपराधी (वर्तमान में फरार) अपने एक सह साजिशकर्ता अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह के साथ लगभग 6 माह पूर्व जमशेदपुर आकर रहने लगा था और अपहृत की गतिविधियों की लगातार रेकी कर रहा था. उसने अमरिंदर सिंह के नाम से साकची क्षेत्र में किराये का कमरा लिया था और वहीं से पूरी साजिश की रुपरेखा तैयार की गयी थी.
इस दौरान अन्य साजिशकर्ता गुड्डू सिंह, मोहम्मद इमरान, मनप्रीत सिंह, गुरजित सिंह जमशेदपुर आये थे और अपहृत कारोबारी पुत्र की रेकी की. पुलिस की जांच में पता चला है कि अपहरणकर्ता द्वारा आपस में एक दूसरे की पहचान जानबूझकर नहीं करायी गयी थी ताकि गिरफ्तारी की स्थिति में संपूर्ण षड़यंत्र उजागर ना हो सके. घटना में मनप्रीत सिंह द्वारा वाहन चालक की भूमिका निभायी गयी जबकि अमरिंदर सिंह उर्फ करतार सिंह, गुड्डू, इमरान, रमीज और अन्य अपराधी पुलिस की वर्दी पहनकर घटनास्थल पर पहुंचे. इनके सहयोग के लिए राजकरण, संतोष और गुरदीत शेर सिंह भी मौजूद थे.
घटना को अंजाम देने के बाद अपहृत को स्कार्पियो वाहन से चांडिल गोलचक्कर के समीप ले जाकर दूसरे वाहन में स्थानांतरित किया गया. इसके बाद दोनों वाहन अलग अलग मार्ग से शहर छोड़कर भागे. अपहृत को अन्य वाहन से रांची होते हुए डोभी ले जाया गया, जहां पूर्व से मौजूद अन्य अपराधियों को सुपुर्द किया गया.उनके द्वारा अपहृत को गया जिला अंतर्गत बिसरा गांव में रखा गया. घटना को अंजाम देने के उपरांत सभी अभियुक्त पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार की ओर भाग गये और गिरफ्तारी से बचने के लिए छिप छिप कर रहने लगे. इसके बाद पुलिस की टीम बनायी गयी.
इस टीम ने पंजाब, दिल्ली, कोलकाता और बिहार के कई जिलों में छापामारी की. इसके बाद मनप्रीत सिंह और अमरिंदर सिंह को पंजाब के लुधियाना, कोलकाता से गुरदीत शेर सिंह, गाजियाबाद दिल्ली से संतोष कुमार और बिहार के शेखपुरा से राजकरण यादव को गिरफ्तार किया गया. इस कांड का मुख्य साजिशकर्ता का पकड़ा जाना अभी बाकि है.
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