रांची: बिहार चुनाव से खुद को अलग करने के बाद जेएमएम के वरिष्ठ नेता मनोज पांडेय ने कहा कि हमें बिहार में गठबंधन के लायक नहीं समझा गया। उन्होंने कहा, “हमें नाइंसाफी हुई है, हमारी भावनाएं आहत हैं। अगर हम गठबंधन में चुनाव लड़ते, तो चुनावी माहौल कुछ और होता।”
मनोज पांडेय ने बताया कि राजद और अन्य गठबंधन नेताओं की मानसिकता निराशाजनक रही। उन्होंने कहा, “अगर कोई यह सोच ले कि वह अकेला ही काफी है, तो गठबंधन का क्या मतलब?” इस बयान से साफ संकेत मिलते हैं कि पार्टी राजद और कांग्रेस के रवैये से नाराज है।
मनोज पांडेय ने उदाहरण देते हुए कहा कि झारखंड में हमने गठबंधन में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। हमारे नेता हेमंत सोरेन ने सभी दलों को साथ लेकर चलने का बड़ा उदाहरण पेश किया। लेकिन बिहार में ऐसा नहीं हुआ।
जेएमएम पहले बिहार में 6 सीटों पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुका था, लेकिन बाद में पर्चा दाखिल नहीं किया। इस फैसले का असर झारखंड में गठबंधन के संतुलन पर भी दिख सकता है। झारखंड में गठबंधन में जेएमएम के 34, कांग्रेस के 16, राजद के 4 और वामदलों के 2 विधायक हैं। राजनीतिक जानकार मान रहे हैं कि बिहार चुनाव में जेएमएम की गैर-शिरकत से झारखंड में गठबंधन की स्थिति पर भी असर पड़ेगा।
मनोज पांडेय का यह बयान विपक्षी गठबंधन INDIA ब्लॉक में संभावित असंतुलन और टूट के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। पार्टी का कहना है कि अगर गठबंधन में सम्मान और बराबरी न दी गई तो भविष्य में सहयोग की भावना कमजोर पड़ सकती है।