
बहरागोड़ा: सरस्वती शिशु विद्या मंदिर, बहरागोड़ा में श्रीहरि वनवासी विकास समिति की ओर से आयोजित दो दिवसीय संभाग स्तरीय प्रधानाचार्य बैठक बुधवार को समाप्त हो गई। इस बैठक में झारखंड के पांच जिलों से 22 स्थानों के कुल 25 प्रधानाचार्य (बंधु एवं भगिनी) शामिल हुए। बैठक की शुरुआत मां शारदे, ॐ, भारत माता और सरना माता की तस्वीर पर पुष्प अर्पित कर और दीप जलाकर की गई।
इस अवसर पर वनवासी कल्याण केंद्र के विभाग संगठन मंत्री प्रमोद नाथ, श्रीहरि वनवासी विकास समिति के राज्य शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे, सह शिक्षा प्रमुख जगमोहन बड़ाईक, जिला निरीक्षक हीरालाल महतो और पूर्वी सिंहभूम के संगठन मंत्री घनश्याम रजवार मंच पर उपस्थित थे।
बैठक के पहले सत्र में प्रमोद नाथ ने वनवासी कल्याण केंद्र की कार्य प्रणाली, संगठन की संरचना, मासिक रिपोर्टिंग, आय-व्यय और अंकेक्षण से जुड़ी प्रक्रियाओं की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सभी प्रधानाचार्यों को मासिक तलपट (रिपोर्ट) नियमित रूप से प्रांत कार्यालय में भेजनी चाहिए।
शिक्षा प्रमुख सुभाष चंद्र दुबे ने विभिन्न सत्रों में शिक्षा से जुड़ी योजनाओं और नवाचारों पर विस्तार से बात की। उन्होंने बताया कि एक प्रधानाचार्य को विद्यालय के शैक्षणिक, बौद्धिक और शारीरिक विकास के हर पहलू पर विशेष ध्यान देना चाहिए। साथ ही छात्रों में संस्कार और आत्मनिर्भरता की भावना कैसे विकसित हो, इस पर भी मार्गदर्शन दिया गया।
चर्चा के प्रमुख बिंदु
बैठक में जिन प्रमुख विषयों पर गहन चर्चा हुई, वे इस प्रकार हैं:
दस्तावेजीकरण और रिपोर्टिंग की व्यवस्था
त्रिवर्षीय कार्य योजना और उसके सात प्रमुख बिंदु
राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) और उसका प्रभावी क्रियान्वयन
पंचकोशीय शिक्षा प्रणाली
स्कूल संचालन में संगठन, प्रशासन और अकादमिक पक्षों की भूमिका
शिक्षक प्रशिक्षण में नयापन और प्रयोग
स्वावलंबी और दुर्बल प्रकल्पों का सुदृढ़ीकरण
प्रकल्प समितियों का पुनर्गठन और स्थानीकरण
संघ के पंच परिवर्तन और प्रशिक्षण टोली की भूमिका
दो दिन की इस बैठक को पांच सत्रों में विभाजित किया गया था। सभी सत्रों में भाग लेने वाले प्रधानाचार्यगण ने विषयों को गंभीरता से सुना और अपने अनुभव साझा किए। बैठक ने शिक्षकों को नई दृष्टि देने का काम किया और आगामी शैक्षणिक सत्र के लिए स्पष्ट दिशा तय की।
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