US और इज़राइली हवाई हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत, ईरान में 40 दिन के शोक और एक हफ़्ते की छुट्टी का ऐलान

तेहरान : ईरान की सरकारी टीवी ने एक भावुक पोस्ट लिखकर बताया किया कि सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खमेनेई अमेरिका एवं इजरायल की ओर से किए गए संयुक्त हमले में मारे गए। इस घटना के बाद ईरानी सरकार ने खामेनेई की मौत पर 40 दिन के शोक और एक हफ़्ते की छुट्टी का ऐलान किया। शनिवार को ही ट्रंप ने इस खबर पर ट्रुथ सोशल पर पोस्ट किया था। उन्होंने सीधे-सीधे कहा कि अयातुल्लाह अली खामेनेई मर चुका है। उनका बयान कुछ ऐसा था “खामेनेई, इतिहास के सबसे (दुष्ट) लोगों में से एक, मर चुका है।”ट्रंप ने लिखा कि वो हमारी इंटेलिजेंस और बहुत एडवांस ट्रैकिंग सिस्टम से बच नहीं पाया। इसराइल के साथ मिलकर हमने काम किया, और उसके साथ मारे गए दूसरे लीडर्स भी कुछ नहीं कर पाए।

फिर ईरान के लोगों को संबोधित करते हुए कहा “ये ईरान के लोगों के लिए अपना देश वापस लेने का सबसे बड़ा मौका है। उम्मीद है कि IRGC (रिवोल्यूशनरी गार्ड्स) और पुलिस ईरानी पैट्रियट्स (देशभक्तों) के साथ मिलकर शांतिपूर्ण तरीके से काम करेंगे और देश को वापस उसकी महानता में लाएंगे।”

ट्रंप ने ये भी कहा कि हमले जारी रहेंगे “भारी और सटीक बॉम्बिंग” हफ्ते भर या जितना जरूरी हो, बिना रुके चलेगी, ताकि मिडिल ईस्ट और पूरी दुनिया में शांति आए।कुछ जगहों पर इसे “जस्टिस” (न्याय) बताया ट्रंप ने ईरान के लोगों के लिए, अमेरिकियों के लिए, और दुनिया भर के उन लोगों के लिए जो खामेनेई और उसके “खूंखार गुंडों” से मारे गए या घायल हुए।

ट्रंप ने ईरानियों से अपील की कि अब शासन पर कब्जा कर लो, और कहा कि कुछ अच्छे कैंडिडेट्स हैं जो आगे लीड कर सकते हैं (लेकिन नाम नहीं बताया)।
कुल मिलाकर, ट्रंप का टोन बहुत सख्त और जीत का था जैसे वो कह रहे हों कि एक बड़ा खतरा खत्म हो गया, अब ईरान के लोग आजाद हो सकते हैं, और हमला रुकने वाला नहीं है। ईरान की स्टेट मीडिया ने बाद में मौत की पुष्टि की, और 40 दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया।

खामेनेई 1939 में पैदा हुए, 86 साल के थे। खुमैनी के बाद 1989 में वो सबसे बड़े नेता बने। उन्होंने ईरान को सख्त इस्लामी नियमों वाला देश बनाया। परमाणु प्रोग्राम को तेज किया, प्रतिबंधों के बावजूद नहीं रुका। उन्होंने “प्रतिरोध का गठबंधन” बनाया – सीरिया का असद, हिजबुल्लाह, हमास, हूती – इनके जरिए इसराइल और अमेरिका पर हमले करवाए। घर में विरोध करने वालों को कुचला 2009 में चुनाव धांधली के खिलाफ लाखों सड़कों पर आए, तो गोली चली। 2019 में पेट्रोल महंगा होने पर विरोध, हजारों मारे गए। 2022 में महसा अमीनी की मौत के बाद लड़कियों-महिलाओं का हिजाब विरोध, वो भी दबा दिया। अर्थव्यवस्था पर ज्यादा ध्यान नहीं, सैन्य खर्च ज्यादा किया। मुद्रास्फीति, बेरोजगारी बढ़ी। युवा लोग सरकार से नाराज हैं। खामेनेई ने अमेरिका से बात करने को जहर कहा, लेकिन ईरान को मजबूत बनाने की कोशिश की पर कामयाब नहीं हुए।

 

 

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