नई दिल्ली: वर्ष की सभी पूर्णिमाओं में आश्विन मास की शरद पूर्णिमा विशेष मानी जाती है। इस साल यह पर्व 6 अक्टूबर, सोमवार को मनाया जाएगा। इसे कोजोगार पूर्णिमा, रास पूर्णिमा या कुमार पूर्णिमा भी कहा जाता है। इस दिन रखा जाने वाला व्रत कौमुदी व्रत कहलाता है। यह तिथि दोपहर 12:23 बजे शुरू होकर अगले दिन सुबह 9:16 बजे समाप्त होगी।
चांद और खीर का महत्व
हिंदू धर्म शास्त्रों के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से पूर्ण होकर धरती पर उज्ज्वल चांदनी फैलाता है। इस रात चंद्रमा की किरणों में खीर रखने से वह औषधीय गुणों वाली अमृत जैसी बन जाती है। इसे खाने से स्वास्थ्य और उन्नति दोनों होती हैं।
शुभ मुहूर्त
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:39 से 05:28 बजे
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:45 से 12:32 बजे
निशिता मुहूर्त: रात 11:45 से 12:34 बजे
चंद्रोदय और चंद्रास्त
चंद्रोदय: 6 अक्टूबर, शाम 05:27 बजे
चंद्रास्त: 7 अक्टूबर, सुबह 06:14 बजे
श्रीकृष्ण की महारास लीला
श्रीमद्भागवत के अनुसार, आश्विन मास की पूर्णिमा पर भगवान श्रीकृष्ण और राधा ने वृंदावन के निधिवन में अपनी अद्भुत महारास लीला रची थी। इस दौरान भगवान श्री कृष्ण ने अपनी नौ लाख गोपिकाओं के साथ नौ लाख अलग-अलग गोपों के रूप में ब्रज में रास रचाया। इसलिए इस पूर्णिमा का धार्मिक महत्व और बढ़ जाता है।
खीर रखने का सही समय
शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा पृथ्वी के सबसे निकट होता है और अपनी सोलह कलाओं से पूर्ण रहता है। शास्त्रों के अनुसार इस रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। उसकी किरणें फसल, पेड़-पौधों और खाद्य पदार्थों में पड़ती हैं और उन्हें जीवनदायिनी शक्ति देती हैं। इसी कारण इस दिन खुले आसमान के नीचे खीर खाने का विशेष महत्व माना जाता है। इस साल शरद पूर्णिमा की लाभ-उन्नति मुहूर्त शाम 10:37 बजे से लेकर देर रात 12:09 बजे तक है। इस समय खीर रखकर चंद्रमा की किरणों में रखें। यह स्वास्थ्य लाभ और उन्नति दोनों में सहायक होगी।
मां लक्ष्मी का पृथ्वी आगमन
मान्यता के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ पृथ्वी पर आती हैं और भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। यह दिन मां लक्ष्मी का स्वागत करने और उनके आशिर्वाद पाने का भी विशेष अवसर है। कहते हैं कि इस दिन सूर्य और चंद्रमा की पूजा करने से कन्याओं को अपने मनपसंद वर की प्राप्ति होती है।