
पटना: बिहार की राजनीति आज एक निर्णायक मोड़ पर खड़ी है. राज्य में महागठबंधन द्वारा आहूत बिहार बंद के समर्थन में कांग्रेस सांसद राहुल गांधी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने पटना की सड़कों पर संयुक्त मार्च की शुरुआत की. इस मौके पर भाकपा महासचिव डी. राजा, सीपीआई (एमएल) नेता दीपांकर भट्टाचार्य, बिहार कांग्रेस अध्यक्ष राजेश राम और वीआईपी प्रमुख मुकेश सहनी जैसे बड़े नेता भी मार्च में शामिल हुए.
लोकतंत्र की रक्षा में सड़क पर उतरना जरूरी: कन्हैया कुमार
बिहार बंद को लेकर कांग्रेस नेता कन्हैया कुमार ने कहा,
“सड़कों पर उतरना लोकतंत्र की रक्षा के लिए जरूरी है. कहा जाता है कि जब सड़कें सूनी हो जाती हैं, तब संसद आवारा हो जाती है.”
उनके इस बयान ने आंदोलन के नैतिक पक्ष को जनता के सामने रखने की कोशिश की है.
तेजस्वी यादव का तीखा हमला: ‘क्रिमिनल डिसऑर्डर’ है बिहार
आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने कानून व्यवस्था को लेकर नीतीश सरकार पर तीखा हमला बोला. उन्होंने कहा,
“यहां लॉ एंड ऑर्डर का नहीं, क्रिमिनल डिसऑर्डर का राज है. मुख्यमंत्री अचेत हैं और पूरी तरह हाईजैक हो चुके हैं.”
उनके इस बयान से बिहार की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं.
पप्पू यादव का जोशीला प्रदर्शन, चुनाव आयोग पर बरसे
सांसद पप्पू यादव भी अपने समर्थकों के साथ बिहार बंद के समर्थन में पटना सचिवालय हॉल्ट पर उतरे. उन्होंने ट्रेन को रोकते हुए केंद्र सरकार और चुनाव आयोग पर तीखे शब्दों में हमला बोला. उन्होंने कहा,
“हम जन्म लेंगे और नागरिक नहीं माने जाएंगे? वोटर लिस्ट पुनरीक्षण एससी-एसटी और ओबीसी के अधिकारों पर हमला है.”
जेडीयू का पलटवार: ‘संवैधानिक संस्थाओं पर हमला कर रहा विपक्ष’
इस आंदोलन पर जेडीयू नेता नीरज कुमार ने प्रतिक्रिया दी. उन्होंने कहा,
“महागठबंधन का यह एक राजनीतिक बंधन है. जो लोग संविधान की प्रति हाथ में लेकर चल रहे हैं, वही संवैधानिक संस्थाओं पर सवाल उठा रहे हैं.”
उन्होंने यह भी कहा कि मतदाता सूची से मृत लोगों के नाम हटाना एक तकनीकी प्रक्रिया है, जिसे विपक्ष राजनीतिक रंग दे रहा है.
सड़क पर सियासत या सच्चा संघर्ष?
बिहार बंद के इस व्यापक प्रदर्शन ने चुनावी मौसम की गर्माहट बढ़ा दी है. जहां एक ओर विपक्ष इसे लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बता रहा है, वहीं सत्ता पक्ष इसे महज एक राजनीतिक नौटंकी करार दे रहा है.
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