
रांची: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने बुधवार को रांची के मेडिका अस्पताल पहुंचकर वयोवृद्ध नेता और पूर्व लोकसभा उपाध्यक्ष कड़िया मुंडा से मुलाकात की. उन्होंने चिकित्सकों से बेहतर स्वास्थ्य सुविधा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए. मुख्यमंत्री ने मरांग बुरु से मुंडा के शीघ्र स्वास्थ्य लाभ की प्रार्थना भी की.
मंगलवार को पूर्व सांसद और भाजपा के वरिष्ठ नेता पद्म विभूषण कड़िया मुंडा की तबीयत अचानक बिगड़ गई. सांस लेने में परेशानी के बाद उन्हें खूंटी से रांची स्थित मेडिका मणिपाल अस्पताल लाया गया, जहां उन्हें ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया है. डॉक्टर विजय मिश्रा की देखरेख में इलाज जारी है. फिलहाल उनकी हालत स्थिर बताई जा रही है.
मुंडा की नाजुक स्थिति को देखते हुए खूंटी से रांची तक ग्रीन कॉरिडोर बनाया गया, जिससे करीब 30 मिनट में एंबुलेंस अस्पताल पहुंच गई. इससे पहले, जनवरी 2024 में भी उनकी तबीयत बिगड़ चुकी है.
झारखंड के आदिवासी स्वाभिमान की पहचान
कड़िया मुंडा का जन्म झारखंड की राजधानी रांची के समीप खूंटी जिले में हुआ. खूंटी वही क्षेत्र है, जहां महान स्वतंत्रता सेनानी बिरसा मुंडा का जन्म स्थान उलिहातु गांव स्थित है. उन्होंने रांची विश्वविद्यालय से मानव विज्ञान में स्नातकोत्तर किया, जो विशेषतः आदिवासियों के जीवन व संस्कृति के अध्ययन का विषय है.
सात बार लोकसभा सदस्य, कई बार केंद्रीय मंत्री
कड़िया मुंडा 1977 में पहली बार छठी लोकसभा के लिए खूंटी से सांसद चुने गए. इसके बाद 1989, 1991, 1996, 1998, 1999, 2009 और 2014 में भी वही सीट जीती. उन्होंने मोरारजी देसाई सरकार में राज्य इस्पात मंत्री, और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य किया. 15वीं लोकसभा में वे लोकसभा के उपाध्यक्ष भी रहे.
राज्य निर्माण में निभाई थी अहम भूमिका
नवगठित झारखंड के पहले मुख्यमंत्री बनने की दौड़ में वे एक प्रमुख दावेदार थे. हालांकि अंततः बाबूलाल मरांडी को यह जिम्मेदारी मिली. मुंडा को बाद में कृषि व ग्रामीण उद्योग और फिर कोयला व नवपारंपरिक ऊर्जा स्रोत मंत्री बनाया गया.
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