
अकेले रहने वाले निस्सहाय लोगों के लिए बनाया अनोखा ‘वृद्धाश्रम’
सिद्धार्थ पाण्डेय
पश्चिम सिंहभूम : समाज के गरीब तबके तथा निस्सहाय लोगों की सेवा करने का अगर जज्बा हो तो घर-परिवार कभी आड़े नहीं आता। ऐसा ही जज्बा झारखंड के अति दुर्गम क्षेत्र सारंडा से सटे क्षेत्र में रहने वाले समाजसेवी संतोष कुमार पंडा में है. कई वर्षों से वे सांसडा के जंगलों में निवास करने वाले गरीब, असहाय लोगों का बेटा बनकर निःस्वार्थ सेवा कर रहे हैं। श्री पंडा ने सारंडा से सटे कुमडी,धरनादीरी,कलिता,किरीबुरू व अन्य आस पास के जगहों में ऐसे लोगों के लिए 14 वृद्ध आश्रम ‘अपना घर’ स्थापित कर चुके हैं। जिनका इस संसार में कोई भी परिवार व देखरेख करने वाला नहीं है ।उनका बेटा बनकर वे उन्हें सहयोग व देख रेख कर रहे है l संतोष पांडा पिछले 11 साल से ऐसे लोगों के बीच भोजन एवं स्वास्थ्य की मदद पहुंचा रहे हैं। श्री पंडा का कहना है अपना घर-जमीन होने के बाद कोई भी असहाय आदमी उसे छोड़कर किसी भी हालत में दूर जाना नहीं चाहता। इसलिए ऐसे लोगों के लिए उन्होंने अपना घर को वृद्धाश्रम का रुप दिया है l उनके अपने घर में ही बेटा बनकर सेवा किया है।वर्तमान में सारंडा क्षेत्र के 14 वृद्धाश्रम जो अकेले असहाय रहते थे। उनका बेटा बनकर उनको हर महीने की राशन जैसे कि चावल दाल आलू प्याज लहसुन नमक हल्दी चूड़ा गुड़ चीनी चाय पत्ती साबुन बिस्कुट आदि खाद्य पदार्थ पहुँचाते है। हर महीने जंगल में जाकर उनके घरों में पहुंचने के साथ-साथ समय-समय पर उनके तबीयत खराब होने पर डॉक्टर के पास ले जाकर इलाज कराने का कार्य भी करने का हर संभव प्रयास करते रहते हैं । इसके अतिरक्त सारंडा फॉरेस्ट की कलेईता,बोरदाभाटी गांव,एवं किरीबुरू में चल रही निःशुल्क अंग्रेजी माध्यम स्कूल “शिशु विकास नर्सरी स्कूल ” का संचालन समाजसेवी संतोष पंड़ा स्वयं कर रहे है जहाँ बच्चें निः शुल्क अध्ययन कर रहें है।
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