
नई दिल्ली: अमेरिका की संघीय अपीलीय अदालत ने डोनाल्ड ट्रंप सरकार के ज्यादातर टैरिफ को अवैध करार दिया है। अदालत ने साफ कहा कि राष्ट्रपति के पास संसद की मंजूरी के बिना इस तरह आयात शुल्क लगाने की शक्ति नहीं है। यह फैसला निचली अदालत के पहले दिए गए निर्णय की ही पुष्टि है।
अदालत ने क्या कहा?
11 जजों की पीठ में से 7 ने ट्रंप के टैरिफ को गैरकानूनी माना।
अदालत ने कहा कि टैक्स और टैरिफ लगाने की शक्ति सिर्फ अमेरिकी संसद के पास है।
ट्रंप ने आपातकालीन आर्थिक शक्तियों का गलत इस्तेमाल किया।
कानून में टैरिफ जैसे शब्द न शामिल होने का मतलब यही था कि संसद राष्ट्रपति की असीमित शक्तियों पर रोक चाहती थी।
निचली अदालत का पुराना फैसला
इससे पहले मई 2025 में अमेरिका की अंतरराष्ट्रीय व्यापार अदालत ने भी ट्रंप के टैरिफ को असंवैधानिक कहा था। अदालत ने माना कि राष्ट्रपति आपातकालीन शक्तियों का इस्तेमाल कर संसद के अधिकारों को दरकिनार नहीं कर सकते।
असर दुनिया और भारत पर
भारत और ब्राजील जैसे देशों पर ट्रंप ने 50 फीसदी तक टैरिफ लगाया था। अदालत के इस फैसले से उम्मीद तो जगी है, लेकिन 14 अक्टूबर तक ये टैरिफ लागू रहेंगे। भारतीय निर्यातकों को तत्काल कोई राहत नहीं मिली है। सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के दौरान इन टैरिफ की अवधि और बढ़ा सकता है।
ट्रंप और व्हाइट हाउस की प्रतिक्रिया
ट्रंप ने अपने सोशल प्लेटफॉर्म पर लिखा, “सभी टैरिफ अब भी लागू हैं, इन्हें हटाना देश के लिए आपदा होगा।”
व्हाइट हाउस के प्रवक्ता ने कहा कि राष्ट्रपति ने कानूनी अधिकारों के तहत यह कदम उठाया था और हम अंतिम जीत की उम्मीद कर रहे हैं।
अब आगे क्या?
मामला अब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में जाएगा। सुप्रीम कोर्ट का फैसला अंतिम होगा और राष्ट्रपति व संसद की शक्तियों की सीमाएं तय करेगा।
अगर ट्रंप प्रशासन हार जाता है, तो सवाल उठेगा कि पहले से वसूला गया टैरिफ आयातकों को कैसे लौटाया जाएगा।
इसे भी पढ़ें :