
जमशेदपुर: जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित एक होटल में विश्व हाथी दिवस के मौके पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। इसमें वन विभाग के अधिकारी, कर्मचारी, वन रक्षक और स्कूल के बच्चे शामिल हुए। कार्यक्रम में हाथियों की सुरक्षा और संरक्षण पर चर्चा हुई।
हाथियों के लिए नया वैन समर्पित, स्मृति चिन्ह देकर सम्मान
कार्यक्रम के दौरान हाथियों की सुरक्षा के लिए वन विभाग को एक बड़ा वैन भी समर्पित किया गया, जिसे अतिथियों ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके अलावा, वन कर्मियों को उनके समर्पित कार्य के लिए स्मृति चिन्ह और प्रमाण पत्र देकर सम्मानित किया गया।
क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक स्मृति पंकज का संबोधन
सिंघभूम के क्षेत्रीय मुख्य वन संरक्षक (आईएफएस) स्मृति पंकज ने बताया कि हाथी आमतौर पर 20 से 25 के झुंड में चलते हैं। उनका मकसद है कि हाथी अपने प्राकृतिक रास्ते से ना भटके और जंगल सुरक्षित रहे।
उन्होंने बताया कि हाथियों को बांस बहुत पसंद है, इसलिए पूरे सिंहभूम क्षेत्र में पिछले साल लगभग 2 लाख बांस के पौधे लगाए गए हैं। खासकर पूर्वी सिंहभूम के चाकुलिया क्षेत्र में बांस लगाने पर ज्यादा फोकस किया गया है ताकि हाथियों को भोजन और सुरक्षा दोनों मिल सके।
हाथियों की देखरेख और सुरक्षा पर जोर
स्मृति पंकज ने जमशेदपुर के डीएफओ सबा आलम की तारीफ करते हुए कहा कि हाथियों के लिए पानी और सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था उन्होंने की है।
उन्होंने बताया कि एक हाथी का वजन 4000 से 5000 किलो तक हो सकता है और वह रोजाना 70 किलोमीटर तक चलता है। रेलवे से होने वाली दुर्घटनाओं पर उन्होंने चिंता जताई।
वन अधिकारी का संदेश: जागरूकता जरूरी
कार्यक्रम में वन अधिकारी अशोक कुमार ने बताया कि क्षेत्र में हाथियों की संख्या बढ़ रही है और सुरक्षा भी बेहतर हुई है।
उन्होंने कहा कि हाथियों के बीमार या दुर्घटनाग्रस्त होने पर वन विभाग के पास अब एक नया वैन भी है, जिससे सहायता पहुंचाना आसान होगा। उन्होंने लोगों से हाथियों के प्रति जागरूक रहने की अपील की।
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