सरायकेला: सरायकेला-खरसावां जिला प्रशासन के तत्वावधान में अवैध अफीम की खेती रोकने हेतु 3 अक्टूबर से 17 अक्टूबर, 2025 तक “Pre-Cultivation Drive” चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में कुचाई प्रखंड के एस.एस. हाई स्कूल, छात्रावास परिसर दलभंगा में आज जन संवाद कार्यक्रम आयोजित किया गया. कार्यक्रम में जिला उद्यान पदाधिकारी विश्वजीत कुमार सिन्हा, उप निदेशक विजय कुमार सिंह, प्रखंड विकास पदाधिकारी, अंचलाधिकारी, जिला परिषद सदस्य, थाना प्रभारी, स्थानीय मुखिया, ग्राम प्रधान और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि मौजूद रहे।
उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने कहा कि अफीम की अवैध खेती न केवल गैरकानूनी है, बल्कि यह समाज, परिवार और युवाओं के भविष्य के लिए खतरनाक है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे अवैध फसल छोड़कर खरीफ–रबी फसल, बागवानी, फल–सब्जी की वैकल्पिक खेती अपनाएं।
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उपायुक्त ने स्पष्ट किया कि प्रशासन का उद्देश्य दंडात्मक कार्रवाई नहीं, बल्कि जागरूकता, आजीविका संवर्धन और सामाजिक सशक्तिकरण है। उन्होंने महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की सराहना करते हुए कहा कि यह पंचायत स्तर पर सकारात्मक बदलाव का संकेत है।
कार्यक्रम में कृषि विभाग द्वारा किसानों को सरसों, चना, मटर सहित अन्य वैकल्पिक फसलों के बीज वितरित किए गए। इसके साथ ही चयनित लाभुकों को मनरेगा, सावित्रीबाई फुले किशोरी समृद्धि योजना, साइकिल, फूलों-झानो आशीर्वाद योजना, धोती-साड़ी, SHG क्रेडिट लिंकेज, और किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) जैसी विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत परिसंपत्तियां दी गई। विभिन्न विभागों के स्टॉल पर लाभार्थियों को योजनाओं से संबंधित जानकारी दी गई और इच्छुक लोगों से आवेदन भी लिए गए।
पुलिस अधीक्षक मुकेश लुनायत ने कहा कि अफीम की खेती पूरी तरह अवैध है। इसमें संलिप्त पाए जाने पर एनडीपीएस अधिनियम के तहत कठोर कानूनी कार्रवाई होगी, जिसमें अधिकतम 20 वर्ष तक की सजा का प्रावधान है। उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि वे स्वयंसेवी अभियानों के माध्यम से इस कुरीति का उन्मूलन करें और वैकल्पिक खेती अपनाने में प्रशासन का सहयोग दें।
जन संवाद के दौरान रुगुडीह ग्राम निवासी मधुसूदन मुंडा ने कहा कि धुनाडीह से बुरुडीह तक सड़क निर्माण एवं मरम्मत आवश्यक है। उन्होंने कहा कि खराब ट्रांसफॉर्मर शीघ्र दुरुस्त किया जाए और युवाओं को रोजगार एवं स्वरोजगार से जोड़ा जाए ताकि पलायन रोका जा सके।
सभी उपस्थित जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने ग्रामीणों से अनुरोध किया कि वे अवैध फसलों से दूरी बनाकर वैकल्पिक खेती अपनाएं और जिला प्रशासन द्वारा दी जा रही योजनाओं एवं प्रशिक्षण का लाभ उठाएं। जिला प्रशासन इस संवेदनशील मुद्दे पर निरंतर निगरानी और सहायता प्रदान करता रहेगा।
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