Jharkhand: करंट से सुरक्षा या धार्मिक व्यवधान? झारखंड सरकार को सुप्रीम कोर्ट से मिली राहत – जानिए क्या है पूरी बात

रांची: सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को राहत देते हुए रामनवमी के दौरान शोभा यात्रा वाले मार्गों पर बिजली आपूर्ति अस्थायी रूप से बंद करने की अनुमति प्रदान की है. यह फैसला करंट लगने की घटनाओं को रोकने की दृष्टि से लिया गया है.

बीस वर्ष पुरानी त्रासदी बनी निर्णय की पृष्ठभूमि

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने अदालत को बताया कि अप्रैल 2000 में रामनवमी के दौरान करंट लगने से 28 लोगों की मृत्यु हो गई थी. उसी के बाद राज्य सरकार ने यह एहतियाती उपाय लागू किया. तब से अब तक प्रत्येक वर्ष धार्मिक शोभा यात्राओं के दौरान इसी नीति का पालन किया जा रहा है.

हाईकोर्ट के आदेश को दी गई सुप्रीम कोर्ट में चुनौती

झारखंड हाईकोर्ट ने 3 अप्रैल को राज्य प्राधिकारियों और झारखंड बिजली वितरण निगम लिमिटेड (JBVNL) को धार्मिक आयोजनों के समय बिजली आपूर्ति बाधित करने से रोक दिया था. राज्य सरकार ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी, जिस पर प्रधान न्यायाधीश संजीव खन्ना, न्यायमूर्ति संजय कुमार और न्यायमूर्ति के वी विश्वनाथन की पीठ ने तत्काल सुनवाई की.

कोर्ट ने माना बिजली कटौती एक सुरक्षात्मक कदम

सुप्रीम कोर्ट ने माना कि धार्मिक शोभा यात्राओं में लोग लंबे ध्वजों के साथ भाग लेते हैं, जिससे करंट लगने का खतरा रहता है. अदालत ने कहा कि केवल उन्हीं मार्गों पर बिजली काटी जाए जहाँ शोभा यात्रा निकलती है और वह भी न्यूनतम अवधि के लिए.

अस्पतालों में आपूर्ति बनी रहे- सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट निर्देश

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अस्पतालों में बिजली आपूर्ति किसी भी स्थिति में बाधित नहीं होनी चाहिए. अदालत ने JBVNL के प्रमुख को निर्देश दिया कि वे 5 अप्रैल की दोपहर तक झारखंड हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल करें. इस हलफनामे में यह सुनिश्चित किया जाए कि बिजली कटौती केवल सीमित अवधि व आवश्यक मार्गों पर ही होगी और आपातकालीन सेवाएं चालू रहेंगी.

मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड हाईकोर्ट की रजिस्ट्री को नोटिस जारी करते हुए मामले की अगली सुनवाई 8 अप्रैल को निर्धारित की है. राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के अंतरिम आदेश पर एकपक्षीय स्थगन की मांग भी की थी.

रामनवमी, जो भगवान श्रीराम के जन्मोत्सव के रूप में मनाई जाती है, इस वर्ष 6 अप्रैल को पड़ रही है. सुरक्षा और श्रद्धा के संतुलन को लेकर यह निर्णय अहम माना जा रहा है.

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