Jamshedpur: गोपाल मैदान का अस्तित्व समाप्त करने का प्रस्ताव शहर की सांस्कृतिक आत्मा पर आघात : कमल किशोर-संदीप मुरारका

जमशेदपुर : शहर के वरिष्ठ समाजसेवी कमल किशोर अग्रवाल एवं संदीप मुरारका ने संयुक्त रूप से प्रेस विज्ञप्ति जारी करते हुए गोपाल मैदान (पूर्व में रीगल ग्राउंड) का अस्तित्व समाप्त कर वहां उपायुक्त कार्यालय के प्रस्तावित निर्माण के विचार मंथन पर गहरी चिंता व्यक्त की. दोनों ने कहा कि गोपाल मैदान जमशेदपुर का केवल एक हरा भरा ग्राउंड नहीं, बल्कि हमारी सामाजिक चेतना, सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक अभिव्यक्ति का जीवंत प्रतीक है. यह वह भूमि है जिसने राष्ट्रीय स्तर के नेताओं की जनसभाओं, प्रतिष्ठित कवियों के कवि सम्मेलन और हजारों नागरिकों के मिलन-संवाद को अपनी छांव दी है.
सामाजिक, धार्मिक एवं राष्ट्रीय पर्व त्यौहार के आयोजन का गवाह है मैदान
विगत वर्षों में गोपाल मैदान में राजकीय गणतंत्र दिवस व स्वतंत्रता दिवस समारोह, टुसु मेला, फूलों की प्रदर्शनी, डॉग शो, स्वदेशी मेला सहित कई मेले और राष्ट्रीय स्तरीय आदिवासियों का संगम एवं सांस्कृतिक आयोजन ‘संवाद’ जैसे कई प्रमुख आयोजन होते रहे हैं. यह ऐतिहासिक मैदान टाटा वर्कर्स यूनियन के पूर्व अध्यक्ष शहीद वी. जी. गोपाल की स्मृति को समर्पित है, जो इसे और भी पवित्र और गौरवशाली बनाता है. चिंता इस बात की है कि यदि इस हरित सांस्कृतिक धरोहर पर कंक्रीट की संरचना बन गई, तो हरियाली और खुला स्थान तो नष्ट होगा ही, लगातार धरना-प्रदर्शन से शांति भंग होगी, प्रतिदिन ट्रैफिक जाम की स्थिति बनेगी और शहर का इकलौता मुक्त सांस्कृतिक मंच हमेशा के लिए खो जाएगा.
जन भावनाओं का हो सम्मान
कमल किशोर अग्रवाल ने प्रश्न उठाया कि “ऐसे एक ऊर्जावान, युवा और दूरदर्शी उपायुक्त को इस स्थान को प्रस्तावित सूची में जोड़ने की प्रेरणा आखिर किसने दी?”
उन्होंने निवेदन किया कि जन भावनाओं का सम्मान करें. संदीप मुरारका ने उपायुक्त महोदय से करबद्ध आग्रह किया कि गोपाल मैदान को प्रस्तावित स्थलों की सूची से तुरंत हटाया जाए और जमशेदपुर की सामूहिक सांस्कृतिक चेतना को सुरक्षित रखा जाए. जन भावनाओं का सम्मान ही सच्चा प्रशासनिक नेतृत्व होता है.
गोपाल मैदान बचाओ अभियान से जुड़ने की अपील
कमल किशोर अग्रवाल और संदीप मुरारका ने संयुक्त बयान जारी करते हुए कहा कि हम समस्त नागरिकों से भी अनुरोध करते हैं कि वे #SaveGopalMaidan अभियान से जुड़ें और अपनी आवाज बुलंद करें. यह मैदान सिर्फ एक मैदान नहीं, बल्कि हमारी पीढ़ियों की स्मृति, भावनाओं और अभिव्यक्ति का स्थान है.
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