
चाईबासा: चाईबासा के सिंहभूम स्पोर्ट्स एसोसिएशन मैदान में इस साल का विश्व आदिवासी दिवस सादगी और पारंपरिक तरीके से मनाया गया। यह आयोजन दिसुम गुरु शिबू सोरेन को समर्पित था। कार्यक्रम की शुरुआत आदिवासी समुदायों के पुजारियों ने पारंपरिक पूजा-पाठ से की। इसके बाद सामूहिक गोवारी (प्रार्थना) हुई और स्व. शिबू सोरेन के सम्मान में 2 मिनट का मौन रखा गया।
जिला और राज्य के अलग-अलग इलाकों—मनोहरपुर, गुवा, नोवामुंडी, जमशेदपुर, रांची सहित पड़ोसी राज्यों से भी लोग पहुंचे।
पूर्व मुख्यमंत्री मधु कोड़ा, पूर्व सांसद गीता कोड़ा, विधायक दशरथ गगराई, जिला प्रशासन के अधिकारी और बड़ी संख्या में अतिथि मौजूद रहे।
सांस्कृतिक रंगों से सजा मंच
कार्यक्रम में अलग-अलग आदिवासी समाज की नृत्य टीमों ने प्रस्तुति दी, जिनमें भारत मुंडा समाज, उरांव समाज बान टोला, नदीपार उरांव समाज, हो ट्रेडिशनल सुसुन टीम (हरिगुटू), संथाल समाज, पुलिस लाइन नृत्य टीम और कई अन्य टीमें शामिल थीं।
महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा
मंच से कई विषयों पर विचार रखे गए, जैसे—
आदिवासी युवाओं का भविष्य और चुनौतियां
आदिवासी भाषा-लिपि का संरक्षण
झारखंड की स्थानीय और नियोजन नीति
पेसा कानून और पारंपरिक स्वशासन
धर्म और धर्मांतरण से बचाव
कार्यक्रम में JPSC में सफल उम्मीदवारों—अभिषेक पिंघुवा, कृति सिंह कुंटिया, प्रियंका हेम्ब्रम, संदीप बंकिरा, रसिका जामुदा, प्रीति देवगम, इपिल अंकिता हेम्ब्रम, अमनदीप बिरूवा, कश्मीरा हेम्ब्रम, अमंत पाड़ेया—को सम्मानित किया गया।
इसके अलावा खेल, शिक्षा, कृषि, पर्यावरण, कला, स्वास्थ्य और समाजसेवा में उत्कृष्ट कार्य करने वाले बसंती बिरहोर, जितेन सोरेन, अजय जोंको, सोम सागर सिंकु, सुशीला बिरूवा, डॉ. हिरेन्द्र बिरूवा सहित कई लोगों को सम्मानित किया गया।
मैदान में 100 से अधिक स्टॉल लगे, जिनमें पारंपरिक कपड़े, आभूषण, व्यंजन और जनजातीय साहित्य प्रदर्शित किए गए। सविता सिंकु, अमर लकड़ा, प्रियंका कालुंडिया, बन्धुराम सोय समेत कई महिला समूह और युवा उद्यमी शामिल थे।
कार्यक्रम में हो, मुंडा, संथाल, उरांव, बिरहोर, खड़िया, लोहार, मानकी-मुंडा सहित 40 से अधिक आदिवासी संगठन जुड़े। आयोजन समिति के अध्यक्ष इपिल सामड, संयोजक गणेश पाट पिंगुआ, उपाध्यक्ष लाल कुजूर, सचिव रवि बिरुली और अन्य पदाधिकारियों ने मिलकर कार्यक्रम को सफल बनाया।
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