Tribute To Nirmal Mahato: झारखंड आंदोलन की आवाज़ थे शहीद निर्मल महतो – संघर्षों से सीखा, नेतृत्व में निखरे

जमशेदपुर:  आज जब झारखंड शहीद दिवस मना रहा है, पूरा राज्य एक ऐसे नेता को याद कर रहा है जिन्होंने सिर्फ 37 साल की उम्र में पूरे जनांदोलन को नई दिशा दी — शहीद निर्मल महतो।

25 दिसंबर 1950 को जमशेदपुर के उलियान गांव में जन्मे निर्मल महतो, एक साधारण परिवार से थे। पिता जगबंधु महतो और माता प्रिया बाला महतो के सिखाए संस्कारों ने उन्हें बचपन से ही संघर्षशील बनाया।
उन्होंने श्रमिक यूनियन विद्यालय और सहकारी कॉलेज से पढ़ाई की। आर्थिक तंगी के बावजूद वे पढ़ाई के साथ-साथ ट्यूशन कर परिवार को सहारा देते थे।

चार साल में साधारण कार्यकर्ता से अध्यक्ष तक का सफर
निर्मल महतो ने 15 दिसंबर 1980 को झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) से जुड़कर राजनीति में कदम रखा। केवल चार सालों में, 1984 में वे JMM के केंद्रीय अध्यक्ष बन गए। यह उनके नेतृत्व और जनसमर्थन का प्रमाण था।

छात्र आंदोलन से मिली नई ताकत
22 जून 1986 को उन्होंने छात्र संगठन ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (AJSU) की स्थापना की। यह कदम झारखंड आंदोलन की जड़ों को युवा शक्ति से जोड़ने वाला साबित हुआ।

सामाजिक सरोकारों में भी थे अग्रणी
निर्मल महतो समाज में व्याप्त बुराइयों से भी लगातार लड़ते रहे।

नशा मुक्ति अभियान में सक्रिय रहे
अवैध शराब और साहूकारी प्रथा के खिलाफ मोर्चा खोला
मजदूरों के शोषण के विरुद्ध आवाज़ उठाई
जरूरतमंदों की मदद के लिए हमेशा आगे रहते थे

एक विवाह समारोह में जब दहेज के रूप में सोने की चेन मांगी गई, तो उन्होंने अपनी खुद की चेन उतार कर दे दी। यह उनकी संवेदनशीलता और मानवता की मिसाल है।

8 अगस्त 1987: शहादत का वो काला दिन
इस दिन जमशेदपुर के टिस्को गेस्ट हाउस के बाहर अपराधियों ने निर्मल महतो की गोली मारकर हत्या कर दी।
उनकी शहादत ने पूरे झारखंड को झकझोर दिया। शैलेन्द्र महतो और सूर्य सिंह बेसरा के नेतृत्व में तीन दिनों का बंद हुआ। इसका असर इतना व्यापक था कि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने झारखंड राज्य की मांग पर विचार का आश्वासन दिया।

शहादत से मिली आंदोलन को नई ऊर्जा
निर्मल महतो की मृत्यु किसी एक नेता की नहीं, एक विचारधारा की कुर्बानी थी। पर उनका बलिदान झारखंड राज्य निर्माण की नींव बन गया। उनकी शहादत ने पूरे जनांदोलन में नई चेतना भर दी। निर्मल महतो सिर्फ एक व्यक्ति नहीं थे, वे एक प्रेरणा, एक दृष्टिकोण और एक संघर्ष की ध्वनि थे। उनकी सादगी, नेतृत्व क्षमता और जनसेवा की भावना आज भी युवाओं को प्रेरित करती है।

शहीद निर्मल महतो को श्रद्धांजलि
आज शहीद दिवस पर हम उन्हें केवल याद नहीं करते, बल्कि उन्हें नमन करते हैं – उनके अद्भुत साहस, नेतृत्व, और जनभावनाओं के प्रति समर्पण के लिए।
शहीद निर्मल महतो अमर रहें।

— अशोक महतो

 

 

इसे भी पढ़ें : Ranchi: विधायक जयराम महतो ने किया शहीद निर्मल महतो की प्रतिमा का अनावरण

Spread the love
  • Related Posts

    Potka : श्री श्री चैतन्य महाप्रभु के 540 वें आविर्भाव दिवस पर डोमजूडी में निकला भव्य नगर कीर्तन, झूमे भक्तजन

    Potka : श्री श्री चैतन्य महाप्रभु के 540 वें आविर्भाव दिवस पर डोमजूडी में निकला भव्य नगर कीर्तन, झूमे भक्तजन जादूगोड़ा : आदिम झारखंड वैष्णव बैरागी समिति पोटका की ओर…

    Spread the love

    Jadugora : ऑल इंडिया सरना धर्म आसरा आश्रम के 50 वर्ष पूरे, चार राज्यों के ग्राम प्रधान, नायके व समाज के प्रमुख लोग पहुंचे, मरांग बुरू से मांगी मन्नते

    जादूगोड़ा : पोटका के चंदनपुर गांव में स्थित आदिवासियों के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल ऑल इंडिया सरना धर्म आसरा आश्रम के 50 वर्ष पूरे हो गए। इस मौके पर बाहा बोगा…

    Spread the love

    Leave a Reply

    Your email address will not be published. Required fields are marked *