Bahragora: स्वर्णरेखा नहर परियोजना दो वर्षों से अधर पर लटका, ग्रामीणों का आरोप – जमीन हो गई बर्बाद

बहरागोड़ा: बहरागोड़ा प्रखंड के ढोलाबेड़ा (जाड़ापाल) गांव में स्वर्णरेखा नहर परियोजना के तहत जाड़ापाल डिस्ट्रीब्यूटरी (53.890 किमी) का निर्माण कार्य पिछले दो वर्षों से रुका हुआ है. गांव के स्थानीय जमीन मालिक मुआवजे की मांग को लेकर विरोध कर रहे हैं और बिना उचित मुआवजे के भूमि पर निर्माण कार्य को रोकने का प्रयास कर रहे हैं.

ग्रामीणों का आरोप: जमीन हो गई बर्बाद

गांव के जमीन मालिकों ने बताया कि परियोजना के तहत उनके खेतों में बड़े-बड़े चैंबर खोदे गए हैं और पाइपलाइन बिछाई जा रही है. इन कार्यों के कारण उनकी जमीन खेती योग्य नहीं रही. जहां चैंबर बनाए गए हैं, वह जमीन अब बर्बाद हो गई है, और पाइपलाइन के स्थान पर भी कोई काम नहीं किया जा सकता. ग्रामीणों का कहना है कि बार-बार मुआवजे की मांग की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई. वे स्पष्ट रूप से कहते हैं, “जब तक हमें हमारी जमीन का उचित मुआवजा नहीं मिलेगा, तब तक हम इस परियोजना को पूरा नहीं होने देंगे.”

विभागीय अधिकारी की स्थल निरीक्षण

गुरुवार को स्वर्णरेखा नहर प्रमंडल, घाटशिला के सहायक अभियंता धीरज कुमार गुप्ता और कनीय अभियंता विनोद हांसदा ने ढोलाबेड़ा गांव का दौरा किया और स्थिति का जायजा लिया. उन्होंने ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें समझाने की कोशिश की कि इस परियोजना में मुआवजे का प्रावधान नहीं है. हालांकि, ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे और कहा, “हमारी जमीन पर बड़े-बड़े चेंबर बनाए गए हैं, जिससे यह जमीन अब बर्बाद हो गई है. हमें तुरंत मुआवजा चाहिए, अन्यथा कार्य जारी नहीं रहेगा.”

संवेदक की मांग: जमीन दिलवाएं या अंतिम भुगतान करें

स्वर्णरेखा नहर परियोजना का कार्य सत्य साई कंस्ट्रक्शन के संवेदक धनंजय पांडे को सौंपा गया था. पांडे ने कार्यपालक अभियंता को लिखित रूप में पत्र भेजकर कहा कि या तो विभाग जमीन उपलब्ध कराए या उन्हें अंतिम भुगतान किया जाए. पांडे ने बताया, “हमने पूरी मेहनत से काम पूरा करने की कोशिश की, लेकिन विभाग ने हमें भूमि उपलब्ध नहीं कराई. कई बार पत्राचार के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ. अब विभाग द्वारा काम जारी रखने का दबाव मानसिक प्रताड़ना जैसा महसूस हो रहा है.”

विभागीय अधिकारी का तर्क

इस मामले पर सहायक अभियंता धीरज कुमार गुप्ता ने कहा, “स्वर्णरेखा नहर परियोजना के तहत अन्य स्थानों पर भी चेंबर निर्माण हुआ है, लेकिन वहां मुआवजा नहीं दिया गया.” हालांकि, ग्रामीण इस तर्क को मानने के लिए तैयार नहीं हैं और अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि वे इस मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों को दे देंगे.

परियोजना में संकट: समाधान कब मिलेगा?

स्वर्णरेखा नहर परियोजना दो वर्षों से रुकी हुई है और अब तक कोई ठोस समाधान सामने नहीं आया है. विभाग और ग्रामीणों के बीच विवाद बढ़ता जा रहा है, जिससे परियोजना अधर में लटक गई है. अगर जल्द ही कोई हल नहीं निकला, तो यह योजना और लंबी खिंच सकती है, जिससे नहर निर्माण कार्य में और भी मुश्किलें आ सकती हैं.

इसे भी पढ़ें : West Singhbhum: शांति समिति की बैठक, होली और रमजान में शांति बनाए रखने के लिए चाक-चौबंद तैयारी


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