Air Force Plane Crash: राजस्थान में वायुसेना का जगुआर फाइटर प्लेन क्रैश – दो की मौत, मलबे से मिले क्षत-विक्षत शव

चुरू: राजस्थान के चुरू जिले के राजलदेसर थाना क्षेत्र स्थित भाणूदा गांव में बुधवार को भारतीय वायुसेना का एक जगुआर फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही पुलिस व प्रशासन की टीम मौके पर पहुंच गई और सर्च एवं रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया गया। राजलदेसर पुलिस को मलबे के पास से क्षत-विक्षत मानव अवशेष मिले हैं। चुरू एसपी जय यादव ने पुष्टि की है कि घटना में दो लोगों की मौत हुई है।

यह जगुआर विमान से जुड़ा साल 2025 का दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले अप्रैल में गुजरात के जामनगर वायुसेना स्टेशन के पास एक रूटीन ट्रेनिंग मिशन के दौरान एक और जगुआर विमान क्रैश हुआ था। उस दुर्घटना में एक पायलट की जान चली गई थी, जबकि दूसरा पायलट सुरक्षित बच गया था।

स्थानीय थाना प्रभारी कमलेश ने जानकारी दी कि मानव अवशेष स्थल पर मिले हैं, जिससे स्पष्ट है कि इस बार की दुर्घटना में संभावित जानमाल की भारी क्षति हुई है। हालांकि, भारतीय वायुसेना की ओर से आधिकारिक रूप से अभी पायलटों की स्थिति या मृतकों की पहचान की पुष्टि नहीं की गई है।

क्या है जगुआर फाइटर जेट की खासियत?
जगुआर एक ब्रिटिश-फ्रेंच सुपरसोनिक अटैक एयरक्राफ्ट है जो भारतीय वायुसेना में ग्राउंड अटैक और एंटी-शिप मिशन के लिए इस्तेमाल होता है।
यह 30,000 फीट की ऊंचाई पर डेढ़ मिनट में पहुंच सकता है और अधिकतम 36,000 फीट तक उड़ान भरने में सक्षम है।
यह विमान 600 मीटर के छोटे रनवे से भी टेकऑफ और लैंडिंग कर सकता है, जिससे इसकी उपयोगिता युद्ध क्षेत्र में काफी अहम हो जाती है।

क्या सुरक्षा मानकों पर उठने लगे हैं सवाल?
लगातार हो रही दुर्घटनाओं से अब विशेषज्ञ वायुसेना के बेड़े में शामिल पुराने विमानों की कार्यक्षमता और रखरखाव पर सवाल उठाने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ‘जगुआर’ जैसे पुराने विमानों की जगह अब अत्याधुनिक तकनीक से लैस लड़ाकू विमान लाने की आवश्यकता है। इस गंभीर घटना के बाद वायुसेना के उच्च अधिकारी और रक्षा मंत्रालय मामले की जांच कर रहे हैं। हादसे के कारणों और जिम्मेदारियों को चिन्हित करने के लिए कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी की संभावना जताई जा रही है।

 

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