
जमशेदपुर: शुक्रवार रात तेज बारिश और चांडिल व डिमना डैम के फाटकों के खुलने से जमशेदपुर की दोनों प्रमुख नदियां—स्वर्णरेखा और खरकई—खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर बह रही हैं. बागबेड़ा, कदमा, सोनारी, जुगसलाई जैसे इलाके जलमग्न हो गए हैं. अब तक 6000 से ज्यादा घरों में पानी घुस चुका है.
डैम से छोड़े गए हजारों क्यूमेक्स पानी ने शहर में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया. हालांकि राहत की बात यह है कि फिलहाल बारिश थम गई है.
एनडीआरएफ और सिविल डिफेंस ने संभाला मोर्चा
एनडीआरएफ और जिला प्रशासन लगातार राहत और बचाव कार्य में जुटे हुए हैं. शनिवार को नागरिक सुरक्षा विभाग (सिविल डिफेंस) की टीम ने जुगसलाई के इस्लामनगर क्षेत्र में करीब 50 लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया.
प्रधान सहायक सुरेश प्रसाद, चीफ वार्डेन अरुण कुमार और डिप्टी चीफ वार्डेन दया शंकर मिश्रा के नेतृत्व में रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया. स्वयंसेवकों ने घर-घर जाकर पानी और भोजन भी वितरित किया.
सरयू राय की पहल: सामुदायिक भवनों में शरण, खिचड़ी का वितरण
विधायक सरयू राय के निर्देश पर उनके जनसुविधा प्रतिनिधियों और कार्यकर्ताओं ने शंकोसाई, रामनगर, श्यामनगर, कृष्णा नगर, शांति नगर, ओल्ड पुरुलिया रोड, चाणक्यपुरी, दाईगुट्टू और अन्य इलाकों में जाकर लोगों को सामुदायिक भवनों में पहुंचाया.
टीम ने करीब 200 लोगों के लिए खिचड़ी बनवाकर वितरित की. प्रतिनिधियों ने उपायुक्त को क्षेत्र में जलजमाव वाले स्थानों की विस्तृत जानकारी भी दी.
स्लुइस गेट बंद, बाढ़ का जिम्मेदार कौन?
विधायक सरयू राय ने बाढ़ के लिए प्रशासन को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि अगर स्लुइस गेट काम कर रहे होते तो पानी घरों में नहीं घुसता.
उन्होंने बताया कि खरकई और स्वर्णरेखा नदी किनारे लगे स्लुइस गेट समय पर दुरुस्त नहीं किए गए. नतीजतन, बारिश का पानी नालों से होकर बस्तियों में घुस गया.
टाटा स्टील और प्रशासन की आलोचना
सरयू राय ने कहा कि टाटा स्टील ने भले ही मरीन ड्राइव को ऊंचा कर लिया हो, लेकिन उसके किनारे बसी बस्तियों की सुरक्षा पर ध्यान नहीं दिया गया. स्लुइस गेट की विफलता बताती है कि बरसात के बाद भी कोई सबक नहीं लिया गया.
उन्होंने सुझाव दिया कि हर स्लुइस गेट पर हाईपावर पंपसेट लगाया जाए ताकि नालों का पानी सीधे नदी में भेजा जा सके.
नदी की चौड़ाई घटी, जलस्तर बढ़ा
विधायक ने कहा कि स्वर्णरेखा और खरकई नदियों की चौड़ाई पहले की तुलना में कम हो गई है. 2008 से पहले जहां जलस्तर एक फीट बढ़ता था, अब वही पानी 4 से 5 फीट ऊंचा बह रहा है.
इसका मुख्य कारण दोनों किनारों के सुदृढ़ीकरण कार्य हैं, जिससे जलधार संकरी हो गई और पानी तेजी से रिहायशी इलाकों में घुस रहा है.
उपायुक्त से बातचीत, आश्वासन मिला
सरयू राय ने बताया कि उनकी उपायुक्त से बातचीत हुई है. प्रशासन ने आश्वासन दिया है कि जिन घरों में पानी घुसा है, उनके निवासियों को सामुदायिक भवनों में ठहराया जाएगा और भोजन की व्यवस्था की जाएगी.
विधायक ने उम्मीद जताई कि इस बार जो कठिनाइयाँ आई हैं, उन्हें देखते हुए अगली वर्षा से पहले ठोस व्यवस्था की जाएगी.
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