Jamshedpur : सरयू राय ने जमशेदपुर पुलिस पर लगाया गंभीर आरोप

  • मानगो थाने में हमले के असल आरोपी गिरफ्त से बाहर, जमशेदपुर पुलिस पर दबाव और कानून की अनदेखी के आरोप
  • सत्ताधारी नेताओं के दबाव में पुलिस अधिकारी भी ‘भीगी बिल्ली’ बने, कानून की धज्जियाँ उड़ने की आशंका

जमशेदपुर : जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा है कि जमशेदपुर पुलिस द्वारा थानों में दर्ज आपराधिक कांडों के अनुसंधान के क्रम में प्रभावित होकर निर्णय लेने और कानून के प्रावधानों की अनदेखी करने की घटनाएँ चिंताजनक हैं। उन्होंने बताया कि कई मामलों में ठोस प्रमाण नहीं होने के बावजूद आरोपों को सही मान लिया गया और वहीं, ठोस प्रमाण होने के बावजूद मामले दर्ज नहीं किए गए। श्री राय ने कहा कि वरीय पुलिस अधिकारियों को इस प्रवृत्ति को रोकना चाहिए, नहीं तो कानून राजनीतिक दबावों का शिकार बनेगा। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि कांग्रेस से जुड़े एक व्यक्ति द्वारा कदमा थाना में 6 अक्टूबर 2024 को दर्ज प्राथमिकी (163/2024) में आरोप सही करार दिए जाने के बावजूद आरोपी से पूछताछ नहीं हुई और चौदह माह बाद ही नोटिस भेजा गया। उन्होंने इसे हास्यास्पद अनुसंधान करार दिया।

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कानून के अनुसंधान में गंभीर लापरवाही पर उठी सवाल

सरयू राय ने एक अन्य मामले का उल्लेख करते हुए कहा कि मोहरदा के सुधीर सिंह द्वारा नवंबर 2024 में साकची थाना में दर्ज प्राथमिकी साइबर थाना बिष्टुपुर को भेज दी गई। एक वर्ष से अधिक समय बीतने के बावजूद मामला थानों के बीच झूल रहा है, क्योंकि अनुसंधान से किसी दबंग सत्ताधारी नेता के हित पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि हाल ही में मानगो और आजाद नगर के दबंग समूह द्वारा मानगो थाना पर हमला और तोड़फोड़ की गई, जिसमें आरंभ में कुछ गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन मुख्य अपराधी अब भी गिरफ्त से बाहर हैं। ये आरोपी सामाजिक कार्यक्रमों में दबंग राजनीतिक नेता के साथ खुले तौर पर दिख रहे हैं। अनुसंधान करने वाले पुलिस अधिकारी भी इस मामले में प्रभावहीन बने हुए हैं।

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सत्ता पक्ष के दबाव में पुलिस अनुसंधान की विश्वसनीयता पर सवाल

विधायक सरयू राय ने कहा कि उपरोक्त उदाहरण केवल बिंदु भर हैं। मानगो थाना के आसपास अवैध अतिक्रमण और अवैध कारोबार लगातार चल रहे हैं, लेकिन अनुसंधान करने वाली पुलिस को जैसे लकवा मार गया हो। उन्होंने कहा कि न्यायालय के निर्देश पर भेजी गई वीडियो फॉरेंसिक जांच में वीडियो की छवि अस्पष्ट बताई गई, और यह मामला भी सत्ता पक्ष के दबंग नेता से जुड़ा है। श्री राय ने सवाल उठाया कि क्या जिला के वरीय पुलिस पदाधिकारी इस गंभीर स्थिति पर ध्यान देंगे और अनुसंधान में कानून के प्रावधानों की सुरक्षा सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यदि ऐसे हालात जारी रहे, तो न्याय और कानून की गरिमा को गंभीर चोट पहुंचेगी।


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