किसान-मजदूरों का आंदोलन ऐतिहासिक रहा : सुफल महतो
मुरी : संयुक्त किसान मोर्चा एवं ट्रेड यूनियन मोर्चा के आह्वान पर सोमवार को देशव्यापी जेल भरो आंदोलन के तहत झारखंड राज्य किसान सभा ने राहे और सोनाहातू में रास्ता रोको आंदोलन किया। राजपथ राहे में करीब ढाई घंटे और सोनाहातू में तीन घंटे तक चले आंदोलन के दौरान 163 किसानों ने गिरफ्तारी दी। आंदोलन के बाद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम ज्ञापन सौंपा गया।
मुख्य वक्ता के रूप में झारखंड राज्य किसान सभा के महासचिव सुफल महतो ने कहा कि किसान विरोधी भारत-अमेरिका व्यापार समझौता भारतीय किसानों के लिए मौत की घंटी है। अमेरिकी उत्पादों के लिए भारतीय बाजार खोलने से देश के किसान बर्बादी के कगार पर पहुंच जाएंगे। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार किसानों की फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की कानूनी गारंटी देने में विफल रही है, जिसके कारण किसानों की आत्महत्याएं लगातार बढ़ रही हैं।
सुफल महतो ने पेपर लीक और नौकरी बेचने के खिलाफ चल रहे छात्र आंदोलनों की मांगों को पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि 17 अगस्त को विधायकों, सांसदों, मंत्रियों और विपक्ष के नेताओं को ज्ञापन सौंपा जाएगा। 3 अक्टूबर को लखीमपुर खीरी शहादत दिवस पर हर गांव में किसान पंचायत तथा 26 नवंबर से बड़े किसान आंदोलन की शुरुआत की जाएगी।
आंदोलन में उमेश महतो, जयपाल सिंह मुंडा, बिसंबर महतो, रंगोवती देवी, रतन महतो, शोभाराम महतो, प्रेम चंद पातर, घुरन पातर, पांडू राम मुंडा, हरिश्चंद्र प्रमाणिक, बसंत मुंडा, करमी देवी, सोमा मुंडा, कनक मुंडा, जगन्नाथ मुंडा, राजेंद्र सिंह मुंडा, जीतू महतो, नारायण महतो, रामसिंह लोहरा सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
प्रदर्शनकारियों ने भारत-अमेरिका व्यापार समझौता, बीज और बिजली विधेयक तथा चारों लेबर कोड रद्द करने, एमएसपी की कानूनी गारंटी देने, मनरेगा बहाल करने, महंगाई-बेरोजगारी, निजीकरण, पलायन-विस्थापन और जबरन जमीन अधिग्रहण पर रोक लगाने की मांग की। साथ ही खाद्य सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य की गारंटी की मांग को लेकर नारे लगाए गए।
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