
नई दिल्ली: भारत ने अमेरिका के साथ प्रस्तावित 3.6 बिलियन डॉलर के हथियार सौदे को फिलहाल ठंडे बस्ते में डाल दिया है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत पर 25% से बढ़ाकर 50% तक का अतिरिक्त टैरिफ लगा दिया है — जिसका सीधा असर द्विपक्षीय व्यापार और कूटनीति पर देखने को मिल रहा है।
क्या था प्रस्तावित सौदा?
भारत को अमेरिका से निम्नलिखित रक्षा उपकरण खरीदने थे:
जनरल डायनामिक्स का स्ट्राइकर कॉम्बैट व्हीकल
एंटी टैंक मिसाइल सिस्टम – जेवलिन
भारतीय नौसेना के लिए 6 P-8I टोही विमान (Boeing)
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के आगामी अमेरिका दौरे के दौरान इस डील पर चर्चा और संभावित समझौता होना था, लेकिन अब यह दौरा भी रद्द कर दिया गया है।
विदेशी मीडिया रिपोर्टों के बीच भारत के रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि अभी तक स्ट्राइकर या जेवलिन मिसाइल खरीद को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। अमेरिका से कोई आधिकारिक प्रस्ताव भी नहीं मिला है। राजनाथ सिंह के दौरे को लेकर कोई तय तारीख घोषित नहीं हुई थी। मंत्रालय ने रॉयटर्स की रिपोर्ट को खारिज करते हुए कहा कि यह खबरें केवल अटकलों पर आधारित हैं।
ट्रंप प्रशासन का कड़ा रुख: टैरिफ 25% से बढ़ाकर 50%
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने 6 अगस्त को भारत पर लगे 25% अतिरिक्त टैरिफ को दोगुना कर 50% कर दिया। यह टैरिफ रूस से तेल आयात जारी रखने के चलते लगाया गया है। यह दर अब तक के सबसे ऊंचे टैरिफ में से एक मानी जा रही है, जो किसी रणनीतिक साझेदार देश पर लागू की गई है।
भारत का विरोध: “अनुचित रूप से निशाना बनाया गया”
भारत सरकार ने ट्रंप प्रशासन के इस कदम की कड़ी आलोचना की है। सरकारी सूत्रों का कहना है कि भारत को अनुचित ढंग से टारगेट किया जा रहा है।यूरोप और अमेरिका खुद भी रूस से व्यापार कर रहे हैं, फिर भारत को अलग से क्यों निशाना बनाया जा रहा है?
क्या भविष्य में फिर होगा समझौता?
हालांकि, यह पूरी तरह से डील को रद्द करने का संकेत नहीं है। सरकारी सूत्रों के अनुसार, “जैसे ही द्विपक्षीय संबंध और व्यापार नीति स्पष्ट होती है, डील को फिर से शुरू किया जा सकता है।” पर फिलहाल की स्थिति में कोई भी प्रगति नहीं हो रही है।
भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और व्यापारिक संबंधों में हालिया घटनाक्रम ने एक बार फिर यह दिखा दिया है कि कूटनीतिक फैसले आर्थिक और रणनीतिक संतुलन से जुड़े होते हैं। ट्रंप का टैरिफ निर्णय भले ही अस्थायी हो, लेकिन यह भारत की रणनीतिक सतर्कता को और मजबूत करता है।
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