जमशेदपुर: भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के गौरवशाली इतिहास में 14 अप्रैल एक विशेष महत्व रखता है. इस दिन 1944 में आज़ाद हिंद फौज (आईएनए) ने मणिपुर के मोइरंग में तिरंगा फहराकर ब्रिटिश साम्राज्य को कड़ा संदेश दिया था. इसे ‘मोइरंग दिवस’ के रूप में मनाया जाता है.वरिष्ठ इतिहास अध्येता वरुण कुमार ने जानकारी दी कि इस दिन को आईएनए के शौर्य, बलिदान और भारत की स्वतंत्रता की आकांक्षा के प्रतीक के रूप में स्मरण किया जाता है. मोइरंग उस समय आईएनए का मुख्यालय था. 14 अप्रैल 1944 को कर्नल शौकत अली मलिक ने यहां भारतीय ध्वज फहराया था.
मोइरंग में संग्रहालय बना प्रेरणा का केंद्र
वर्तमान में मोइरंग में स्थित भारतीय राष्ट्रीय सेना संग्रहालय उस ऐतिहासिक संघर्ष की गवाही देता है. संग्रहालय में रखे चित्र, दस्तावेज़ और युद्ध से जुड़ी स्मृतियाँ आज की पीढ़ी को भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस सशस्त्र अध्याय से जोड़ती हैं, जो अक्सर भुला दिया गया.आईएनए ने मोइरंग के साथ-साथ नागालैंड के कुछ हिस्सों को भी ब्रिटिश शासन से मुक्त कराया था. अंग्रेज़ों ने स्वयं स्वीकार किया था कि यह लड़ाई भारत में लड़ी गई सबसे भीषण लड़ाइयों में से एक थी.
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