
जादूगोड़ा: माटीगोंडा पंचायत के कुलामारा और कोतोपा को जोड़ने वाली एकमात्र कच्ची पुलिया बाढ़ के पानी में बह गई है. इस पुल के ध्वस्त हो जाने से किसानों और मरीजों की मुसीबतें कई गुना बढ़ गई हैं. बैलगाड़ी और ट्रैक्टर अब खेतों तक नहीं पहुंच पा रहे हैं. वहीं मरीजों को खटिया पर लादकर जोखिम भरे रास्ते से ले जाना पड़ रहा है.
पुलिया बहने के कारण चार दिनों से चार पहिया वाहन गांव में प्रवेश नहीं कर पा रहे हैं. ट्रैक्टर, पिकअप और एंबुलेंस जैसी आवश्यक गाड़ियाँ पुलिया के दूसरी ओर फंसी हुई हैं. कोतोपा के ग्रामीण सोना राम भूमिज बताते हैं कि मरीजों को अब कंधे या खटिया पर उठाकर पुल पार कराना पड़ रहा है. खेतों तक ट्रैक्टर पहुंचना असंभव हो गया है, जिससे खेती का कार्य पूरी तरह ठप पड़ गया है.
चाटीकोचा के मंगल सोरेन कहते हैं कि लोग अब बाइक को ठेलकर या पैदल ही पुलिया पार कर रहे हैं. वाहन चालकों और स्कूली बच्चों के लिए यह मार्ग अब जोखिम भरा हो चुका है.
ग्रामीणों ने घाटशिला विधायक और झारखंड के शिक्षा मंत्री राम दास सोरेन से शीघ्र हस्तक्षेप की मांग की है. बकाई गांव के दास देवगम का कहना है कि इस पुल के अभाव में शादी-विवाह जैसे सामाजिक आयोजनों में भी बड़ी अड़चन आ रही है.
ग्रामीणों का कहना है कि झारखंड अलग राज्य बनने के 25 वर्षों बाद इस क्षेत्र में विधायक राम दास सोरेन के प्रयासों से सड़क निर्माण तो शुरू हुआ है, लेकिन पुलिया निर्माण की उपेक्षा से गांव की दुनिया बाढ़ में कट गई है. कोतोपा, बकाई, नेत्राबेड़ा जैसे गांवों का जादूगोड़ा से संपर्क पूर्णतः टूट चुका है. लोग भय और जोखिम के बीच जैसे-तैसे मोटरसाइकिल और पैदल आवाजाही कर रहे हैं.
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