- तुलसी भवन के मानस सभागार में जुटे शहर के साहित्यकार
जमशेदपुर : सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन/तुलसी भवन द्वारा संस्थान के मानस सभागार में नगर के ख्यातिलब्ध साहित्यकार व वास्तुविद् दिव्येन्दु त्रिपाठी की दो पुस्तकों ‘हरेराम त्रिपाठी चेतन : काव्य के विविध आयाम और अनुभूतियों का धरातल’ तथा ‘सभ्यता के शिल्पकार’ का भव्य लोकार्पण समारोह आयोजित किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता तुलसी भवन के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र मुनका ने की, जबकि संचालन साहित्य समिति की सदस्य पूनम महानंद ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में जमशेदपुर को-ऑपरेटिव कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अमर सिंह उपस्थित रहे। विशिष्ट अतिथि के रूप में अरुण कुमार तिवारी एवं डॉ. रागिनी भूषण तथा मुख्य वक्ता के रूप में वरीय साहित्यकार अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ मंचासीन रहे। दीप प्रज्वलन और सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।
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वक्ताओं ने पुस्तकों की साहित्यिक महत्ता पर डाला प्रकाश
लोकार्पित पुस्तक ‘सभ्यता के शिल्पकार’ पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए माधवी उपाध्याय ने कहा कि यह कृति भारतीय समाज के ताने-बाने को समझने में अत्यंत सहायक है। वहीं मुख्य वक्ता अनिरुद्ध त्रिपाठी ‘अशेष’ ने ‘हरेराम त्रिपाठी चेतन : काव्य के विविध आयाम और अनुभूतियों का धरातल’ पर विचार रखते हुए कहा कि यह पुस्तक समालोचना की कसौटी पर खरी उतरती है और आचार्य हरेराम त्रिपाठी चेतन के काव्य संसार का गंभीर विश्लेषण प्रस्तुत करती है। मुख्य अतिथि डॉ. अमर सिंह ने कहा कि ऐसी कृतियां भारतीय साहित्य और संस्कृति को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं तथा इनके संरक्षण पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। लेखक का साहित्यिक जीवन परिचय उपासना सिन्हा और यमुना तिवारी ‘व्यथित’ ने प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।
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शताधिक साहित्यकारों की उपस्थिति से सजा समारोह
समारोह में धन्यवाद ज्ञापन तुलसी भवन के कोषाध्यक्ष विमल जालान ने किया। कार्यक्रम में डॉ. अंगद तिवारी, डॉ. अजय कुमार ओझा, अशोक पाठक ‘स्नेही’, सुरेश चन्द्र झा, कैलाश नाथ शर्मा ‘गाजीपुरी’, डॉ. वीणा पाण्डेय ‘भारती’, रीना सिन्हा, वसंत जमशेदपुरी, अजय प्रजापति, क्षमाश्री दूबे, लक्ष्मी सिंह, डॉ. संध्या सिन्हा, सुस्मिता सलिलात्मजा, हरिहर राय चौहान, शिव नन्दन सिंह, ममता कर्ण, पुनम शर्मा स्नेहिल, नीरज नयन त्रिपाठी, नीलम पेडिवाल, सुदीप्ता जेठी राउत, प्रतिभा प्रसाद कुमकम, डॉ. उदय प्रताप हयात, श्यामल सुमन, चन्द्रकान्त, विन्ध्यवासिनी तिवारी, हरभजन सिंह रहबर, सुनील कुमार उपाध्याय सहित शताधिक साहित्यकारों की गरिमामयी उपस्थिति रही।