सरायकेला: सरायकेला के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र स्थित दलमा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी में हाल ही में आयोजित ‘रन फ़ॉर गजराज’ मैराथन के बाद जंगलों में बड़े पैमाने पर प्लास्टिक का भंडार पाया गया। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम के बाद जंगलों में कूड़ा और प्लास्टिक फैल गया है। उनका कहना है कि विभाग खुद जंगलों को प्रदूषित कर रहा है, जबकि वह पर्यावरण संरक्षण की बातें करता है।
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ग्रामीणों ने कहा कि जंगलों में प्लास्टिक की बोतलें और कूड़ा पड़ा हुआ है, जिससे जंगली जीव-जंतु और मानव जीवन पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। वन विभाग की बड़ी-बड़ी घोषणाएं अब खोखली नजर आने लगी हैं। हालांकि सरकार और मंत्रालय द्वारा ‘एक राष्ट्र, एक मिशन: प्लास्टिक प्रदूषण समाप्त करें’ अभियान चलाया जा रहा है, लेकिन स्थानीय स्तर पर इसका असर दिखाई नहीं दे रहा।
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दलमा जंगल में गज परियोजना पिछले 5-6 वर्षों से ठप पड़ी हुई है। जंगल में भोजन की कमी और अन्य समस्याओं के कारण हाथियों का झुंड पलायन कर ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र में बस गया है। ग्रामीणों ने वन विभाग से सवाल उठाया कि परियोजना में इतने वर्षों तक कोई ठोस कदम क्यों नहीं उठाया गया।
वन विभाग द्वारा इको-टूरिज्म को बढ़ावा देने के लिए निजी स्तर पर कई योजनाएं चल रही हैं, लेकिन वहीं आदिवासी समुदाय को पक्का मकान और अन्य सुविधाओं से वंचित रखा गया है। ग्रामीणों का कहना है कि ऐसे कदमों से वन्य जीवन प्रभावित हो रहा है और हाथियों के पलायन का सिलसिला बढ़ रहा है।
ग्रामीणों ने उच्च स्तरीय जांच और वन विभाग की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। उनका कहना है कि केंद्र और राज्य सरकार द्वारा जंगल और वन्य जीव संरक्षण के लिए करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन जंगल और जीव-जंतु विलुप्त होने के कगार पर हैं।