
जमशेदपुर: तुलसी भवन संस्थान और सिंहभूम जिला हिन्दी साहित्य सम्मेलन द्वारा आयोजित तुलसी जयंती समारोह के अंतर्गत ‘माता शबरी’ और ‘हनुमान’ रूपसज्जा प्रतियोगिता में बच्चों ने अपनी सांस्कृतिक प्रतिभा और रचनात्मकता का अद्भुत प्रदर्शन किया।

विद्या भारती चिन्मया विद्यालय, टेल्को
माता शबरी रूपसज्जा प्रतियोगिता
वर्ग ‘अ’ (कक्षा 1 से 3 तक)
प्रथम स्थान: अग्रिमा मिश्रा (कक्षा 3, चिन्मया विद्यालय, टेल्को)
द्वितीय स्थान:
आकांक्षा (कक्षा 3, शिक्षा निकेतन, टेल्को)
दिव्यांशी कश्यप (कक्षा 1, ब्लू बेल्स स्कूल, मानगो)
तृतीय स्थान:
श्रेया गोप (कक्षा 2, दयानंद पब्लिक स्कूल, साकची)
इप्सिता गोराई (कक्षा 2, रामकृष्ण मिशन इंग्लिश स्कूल, बिष्टुपुर)
प्रोत्साहन पुरस्कार:
आदित्य कुमार चौधरी, रीत रंजन, अनिशा कुमारी, आद्या सिंह
वर्ग ‘ब’ (कक्षा 4 से 7 तक)
प्रथम स्थान: आराध्या अग्रवाल (कक्षा 4, आर.वी.एस. एकेडमी, मानगो)
द्वितीय स्थान:
हरप्रीत कौर (कक्षा 4, एस.डी.एस.एम., सिदगोड़ा)
अमृत कौर (कक्षा 5, मध्य उच्च विद्यालय, लक्ष्मीनगर)
तृतीय स्थान:
सान्वी सिंह (कक्षा 5, डी.बी.एम.एस., कदमा)
आर्या कुमार झा (कक्षा 5, लाजपत पब्लिक स्कूल, साकची)
श्रेया कुमारी (कक्षा 5, के.पी.एस., बर्मामाइंस)
प्रोत्साहन पुरस्कार:
बी. निहारिका, अनिका कुमारी, भव्या वर्मा, वसुंधरा विवेक

दयानंद पब्लिक स्कूल, साकची
श्री हनुमान रूपसज्जा प्रतियोगिता
वर्ग ‘अ’ (कक्षा 1 से 3 तक)
प्रथम स्थान: मिहिर मल्होत्रा (कक्षा 2, दयानंद पब्लिक स्कूल, साकची)
द्वितीय स्थान:
आर्या शरण (हिलटॉप स्कूल, टेल्को)
हर्षित लाल (डी.ए.वी. पब्लिक स्कूल, बिष्टुपुर)
तृतीय स्थान:
अभिषेक राज (के.पी.एस., बर्मामाइंस)
अविनाश मिश्रा (कक्षा 2, आर.वी.एस. एकेडमी, मानगो)
प्रोत्साहन पुरस्कार:
अनध मिश्रा, जगदीश टुडू, बॉबी सिंह, गुरुचरण हो
वर्ग ‘ब’ (कक्षा 4 से 7 तक)
प्रथम स्थान: रूपांश कुमार (कक्षा 5, जे.पी.एस., बारीडीह)
द्वितीय स्थान:
युवांश कुमार (कक्षा 4, एस.डी.एस.एम., सिदगोड़ा)
अर्वण कुमार गोप (कक्षा 4, ए.आई.डब्ल्यू.सी., बारीडीह)
तृतीय स्थान:
ऋजुपाल सिंह (कक्षा 5, उच्च मध्य विद्यालय, लक्ष्मीनगर)
ऋत्विक केशरी (कक्षा 4, आर.वी.एस. एकेडमी, मानगो)
प्रोत्साहन पुरस्कार:
आंजनेय द्विवेदी, आयुष्मान सेनापति
इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से नन्हे कलाकारों ने न सिर्फ मंच पर अपनी प्रस्तुति दी, बल्कि रामायण के चरित्रों को जीवंत कर एक सांस्कृतिक संदेश भी समाज को दिया। आयोजकों के अनुसार इस तरह की प्रतियोगिताएं बच्चों में भारतीय परंपरा, संस्कार और आत्मविश्वास को बढ़ावा देती हैं।
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