जमशेदपुर: विश्व आदिवासी दिवस के अवसर पर बिष्टुपुर स्थित गोपाल मैदान में आदिवासी छात्र एकता, केंद्रीय कमेटी के तत्वावधान में कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोग पारंपरिक आदिवासी वेशभूषा में शामिल हुए। “अपनी पहचान को पहचानो” के संदेश के साथ आयोजित कार्यक्रम में आदिवासी संस्कृति, भाषा, परंपरा और अधिकारों के संरक्षण पर जोर दिया गया। कार्यक्रम के दौरान समाज की प्रमुख महिलाओं को सम्मानित किया गया। अतिथियों एवं आयोजन समिति के सदस्यों ने आदिवासी समाज की एकता और सामाजिक सहभागिता को मजबूत करने का आह्वान किया।
कार्यक्रम में सरना धर्म कोड की मांग, आदिवासी क्षेत्रों को अनुसूचित क्षेत्र में शामिल करने, सीएनटी-एसपीटी कानून के संरक्षण, भूमि बैंक नीति को रद्द करने, स्थानीय लोगों के लिए रोजगार में प्राथमिकता तथा मुंडारी, भूमिज और कुड़ुख भाषाओं को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल करने जैसे मुद्दे प्रमुखता से उठाए गए। आयोजकों ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस केवल उत्सव का अवसर नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, अधिकार और सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण का संकल्प लेने का दिन है। कार्यक्रम में प्रखर विद्वान, छात्रों, सामाजिक नेता एवं बुद्धिजीवी आदिवासियों के उपर मंडरा रहे खतरे SIR, Delimitation जैसे गम्भीर मुद्दों पर भी विचार रखे गए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में समाज के लोग, महिलाएं, युवा और सामाजिक कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कार्यक्रम को सफल बनाने में आयोजक गण एवं आदिवासी छात्र एकता, केन्द्रीय कमिटी का महत्वपूर्व योगदान रहा , जिनमें मुख्य रूप से जोसाई मार्डी (संस्थापक सह मुख्य संरक्षक), इंदर हेम्ब्रोम (संयोजक), हेमेन्द्र हाँसदा (अध्यक्ष), सिधुराम किस्कू, नवीन मुर्मू, हरिमोहन टुडु, नन्दलाल सरदार, राज बांकिरा, स्वपन सरदार, गुरुचरण सोरेन, सुनील माहली, किशोर मार्डी, बुद्धिराम मुर्मू, गांधी माहली, चाँदराय मार्डी, सलमान मुर्मू, सारजोम मार्डी, प्रभाकर हाँसदा, दुलाल हाँसदा, मिथुन मुर्मू, कल्याण हाँसदा, देवानन्द सिंह, फागुराम हाँसदा, सुरेश मुर्मू, प्रिन्स बास्के, सकला मार्डी, हरेन सिंह भूमिज, बिरसिंह टोपनो, सन्नि पूर्ती आदि की
सार्थक भूमिका रही।
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