देवघर: देवघर में होने वाला हर पर्व-त्योहार बाबा बैद्यनाथ से शुरू होता है. होली पर यहां गुरुवार देर रात हरिहर मिलन की परंपरा का निर्वहन किया गया. फाल्गुन मास की पूर्णिमा तिथि यानी गुरुवार रात 11.30 बजे हरि का हर मिलन हुआ. हरि मतलब भगवान विष्णु और हर मतलव भगवान शिव. मान्यता है कि भगवान विष्णु ने होली के दिन ही रावण द्वारा लाए गए बाबा बैद्यनाथ की देवघर में स्थापना की थी. इस कारण यहां हरिहर मिलन की परंपरा है. इस दिन के प्राकट्य दिवस के रूप में भी मनाया जाता है. श्रीकृष्ण की प्रतिमा को बाबा बैद्यनाथ के कामना लिंग से मिलन कराया गया. इसे ही हरिहर मिलन कहा जाता है. देश के अन्य किसी ज्योर्तिलिंग में हरिहर मिलन की परंपरा नहीं है. हरिहर मिलन के अलौकिक क्षण को देखने के लिए देर रात तक मंदिर में भक्तों की भीड़ लगी रही.
इसे भी पढ़ेः BREAKING NEWS: बागबेड़ा भिखारी मैदान स्थित सब्जी बाजार में लगी भीषण आग,कोई हताहत नहीं
इससे पूर्व शाम में बाबा मंदिर स्थित भीतरखंड कार्यालय के भगवान कृष्ण को पालकी में बिठा कर मंदिर की परिक्रमा कराई गई. इसके बाद ढोला-बाजे के साथ कन्हैया जी की शोभायात्रा निकाली गई और उन्हें आजाद चौक स्थित दोलमंच ले जाया गया. जबां भक्तों ने कन्हैया जी को झूले पर झूलाया और रंग-गुलाल अर्पित किया. इसके बाद निर्धारित मुङूर्त में दोलमंच से भगवान कृष्ण यानी विष्णु को बाबा मंदिर लाया गया और कामना लिंग से उनका मिलन कराया गया. हरिहर मिलन के साथ ही देवघर में तीन दिवसीय होली की शुरूआत हो गई. गुरुवार को सूखी होली खेली गई, जबकि शुक्रवार को रंगों से होली खेली जा रही है. होली पर बाबा को मालपुआ का भोग लगाया गया.