बहरागोड़ा : बहरागोड़ा प्रखंड के पानीपोड़ा स्थित स्वर्णरेखा नदी में आठ दिन पहले मिले जिंदा बम को लेकर सोमवार को सुरक्षा एजेंसियों की बड़ी हलचल देखी गई। इस शक्तिशाली बम को सुरक्षित तरीके से निष्क्रिय (Defuse) करने के लिए भारतीय थल सेना और झारखंड सरकार की बम स्क्वायड टीम (रांची) ने संयुक्त रूप से घटनास्थल का निरीक्षण किया।वहीं अधिकारियों ने न केवल बम का तकनीकी मुआयना किया, बल्कि ड्रोन के माध्यम से पूरे इलाके का बारीकी से मेजरमेंट (माप) भी किया। सेना के विशेषज्ञों के अनुसार, यह बम काफी शक्तिशाली है और इसे डिफ्यूज करने के लिए विशेष संसाधनों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में सुरक्षा बल बम को नष्ट करने की रणनीति पर गहन मंथन कर रहे हैं।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम, ग्रामीणों के लिए रेड अलर्ट
प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से बम के चारों ओर घेराबंदी कर दी है। स्थानीय ग्रामीणों को सख्त हिदायत दी गई है कि नदी की ओर मछली मारने न जाएं तथा मवेशियों (बैल-बकरी) को चराने के लिए उस क्षेत्र में न ले जाएं। वहीं बम वाले स्थान से उचित दूरी बनाए रखने की सख्त निर्देश जारी किया गया है।
खुदाई में मिला एक और बम का कवर
निरीक्षण के बाद जब सेना के अधिकारी लौट रहे थे, तब ग्रामीणों ने एक और बम होने की आशंका जताई। त्वरित कार्रवाई करते हुए अधिकारियों ने उस स्थान की खुदाई करवाई। जांच में पाया गया कि वह भी एक पुराने बम का खोखा (कवर) था, जो काफी समय पहले ही निष्क्रिय हो चुका था।
ग्रामीणों में कौतूहल और डर का माहौल
बम स्क्वायड और सेना की टीम के पहुँचते ही मौके पर ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। प्रशासन ने लोगों को शांत रहने और विशेषज्ञों के निर्देशों का पालन करने की अपील की है। फिलहाल, इलाके में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है और सभी की नजरें सेना की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।
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