
रांची: विश्व आदिवासी दिवस पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने दिवंगत पिता दिशोम गुरु शिबू सोरेन को याद करते हुए X (पूर्व ट्विटर) पर भावुक संदेश साझा किया। उन्होंने लिखा— “आज मेरे मार्गदर्शक, मेरे गुरु, मेरे बाबा हमारे साथ नहीं हैं, लेकिन उनका संघर्ष, विचार और आदर्श हमें हमेशा प्रेरणा देंगे।”
उन्होंने कहा कि शिबू सोरेन केवल उनके पिता ही नहीं, बल्कि झारखंड की आत्मा, संघर्ष के प्रतीक और जल-जंगल-जमीन के सबसे मुखर रक्षक थे।
आज विश्व आदिवासी दिवस है पर मेरे मार्गदर्शक, मेरे गुरु, मेरे बाबा सशरीर साथ नहीं हैं, मगर उनका संघर्ष, उनके विचार, उनके आदर्श हमें हमेशा प्रेरणा देते रहेंगे। वह न केवल मेरे पिता थे, बल्कि समस्त आदिवासी समाज समेत झारखण्ड की आत्मा, संघर्ष के प्रतीक और जल-जंगल-जमीन के सबसे मुखर… pic.twitter.com/domOEBP0qe
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 9, 2025
आदिवासी समाज का संदेश
हेमंत ने कहा कि आदिवासी समाज ने दुनिया को प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर जीने का तरीका दिखाया है। लेकिन सदियों से यह समाज हाशिये पर रहा है।
बाबा ने इस स्थिति को बदलने के लिए अपना पूरा जीवन न्यौछावर कर दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि विश्व आदिवासी दिवस राज्य भर में आदिवासी संस्कृति, सभ्यता और प्रतिभा को एक मंच पर लाने का अवसर है। यह दिन हमारे वीर पुरखों के संघर्ष और शहादत को याद करने का दिन है।
मुख्यमंत्री सोरेन ने कहा “मैं अपने वीर पुरखों को नमन करता हूं और संकल्प लेता हूं कि उनके दिखाए रास्ते पर चलकर आदिवासी अस्मिता की मशाल को और ऊंचा करूंगा।”
उन्होंने अंत में जय जोहार, जय आदिवासियत और जय झारखंड का नारा भी लगाया।
हाल ही का निधन
गौरतलब है कि शिबू सोरेन का निधन 4 अगस्त 2025 को हुआ था। उनका अंतिम संस्कार 6 अगस्त को उनके पैतृक गांव नेमरा में राजकीय सम्मान के साथ किया गया। श्राद्धकर्म के कारण CM 14 अगस्त तक नेमरा में रहेंगे और वहीं से सरकारी कार्य देख रहे हैं।
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