CJI पर जूता फेंकने वाले वकील बोले – “गवई ने सनातन धर्म का अपमान किया, मैं चुप नहीं रह सकता था”

नई दिल्ली:  सुप्रीम कोर्ट में 6 अक्टूबर को हुए जूता फेंकने की घटना के आरोपी वकील राकेश किशोर (72) ने पहली बार चुप्पी तोड़ी है। वे कहते हैं — “मैंने हिंसा नहीं की, ये सिर्फ प्रतिक्रिया थी। जस्टिस बी.आर. गवई ने हमारे देवी-देवताओं का अपमान किया था, इसलिए मैंने विरोध किया।”

खजुराहो मूर्ति विवाद से भड़की नाराजगी
16 सितंबर को सीजेआई बी.आर. गवई ने मध्य प्रदेश के खजुराहो के जवारी मंदिर में भगवान विष्णु की खंडित मूर्ति की बहाली की याचिका खारिज कर दी थी। इस पर उन्होंने कथित रूप से कहा था, “जाओ, भगवान से कहो कि वो अपनी मूर्ति खुद ठीक कर लें।” इसी टिप्पणी से नाराज होकर 6 अक्टूबर को राकेश किशोर ने सुप्रीम कोर्ट में गवई पर जूता फेंकने की कोशिश की। हालांकि जूता उन तक नहीं पहुंचा और सुरक्षा कर्मियों ने राकेश को तुरंत पकड़ लिया।

इस दौरान वे नारे लगाते हुए बोले – “सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।”
“पहली हिंसा उनकी तरफ से हुई थी, मैंने सिर्फ प्रतिक्रिया दी”
राकेश कहते हैं, “हिंसा दो तरह की होती है — एक जो दिखाई देती है और दूसरी जो भावनात्मक होती है।
जस्टिस गवई ने हमारी आस्था को ठेस पहुंचाई, वही असली हिंसा थी। मैंने सिर्फ जवाब दिया।”

उन्होंने आगे कहा, “अगर किसी और धर्म के खिलाफ ऐसा कहा जाता, तो क्या अदालत में कोई चुप रहता? हिंदू धर्म को सॉफ्ट टारगेट बनाया जाता है, और मैं ये बर्दाश्त नहीं कर सकता।”

राकेश किशोर बताते हैं कि इस घटना के बाद उनका परिवार उनसे नाराज है। वे कहते हैं, “हमारे समाज की समस्या यही है कि धर्म के अपमान पर हिंदू महिलाएं घर के दरवाजे बंद कर लेती हैं, जबकि दूसरे धर्मों की महिलाएं सड़कों पर उतर जाती हैं। अगर सनातन को बचाना है तो विरोध भी करना होगा।”

कुछ लोगों ने इस घटना को दलित बनाम सवर्ण के मुद्दे से जोड़ने की कोशिश की, जिस पर राकेश ने साफ कहा, “मैं खुद दलित हूं, कोरी समाज से आता हूं।
ये लड़ाई किसी जाति की नहीं, बल्कि सनातन धर्म के सम्मान की है।”

सस्पेंशन से बड़ा झटका: “क्लाइंट केस और पैसा दोनों वापस ले रहे हैं”
9 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन (SCBA) ने उनका लाइसेंस रद्द कर दिया, और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) ने भी उन्हें सस्पेंड कर दिया।
राकेश कहते हैं, “बिना जांच मुझे सस्पेंड कर दिया गया। मेरे सारे क्लाइंट डर गए हैं और केस वापस ले रहे हैं। इससे मुझे काफी आर्थिक नुकसान हुआ है।”
वे कहते हैं कि वे बीमार हैं, हार्ट, किडनी और शुगर की दिक्कत है, फिर भी वे “सनातन के लिए लड़ाई जारी रखेंगे।”

BCI का पक्ष: “वकील का व्यवहार न्यायालय की गरिमा के खिलाफ”
BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा ने बयान जारी कर कहा,“राकेश किशोर का व्यवहार अदालत की गरिमा और पेशेवर आचार संहिता के खिलाफ है। इसलिए उन्हें तत्काल प्रभाव से निलंबित किया गया है।”

WHO से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
राकेश किशोर ने वकालत 2011 में शुरू की थी। उससे पहले वे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और भारत सरकार के डेंगू-मलेरिया प्रोजेक्ट्स में मेडिकल एंटोमोलॉजिस्ट के रूप में काम कर चुके हैं।

 

 

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