Seraikela : आदिवासी संगठनों ने पेसा नियमावली 2025 में उठाई संशोधन की मांग

  • पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की समीक्षा बैठक में दशकों के संघर्ष को याद किया गया

सरायकेला : सरायकेला स्थित सर्किट हाउस में शनिवार को आदिवासी पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में पिछले वर्ष 31 अक्टूबर 2025 को आयोजित महा रैली की सफलता पर चर्चा की गई और झारखंड सरकार द्वारा 02 जनवरी 2026 को कैबिनेट से पारित “पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025” (PESA Rules) का स्वागत किया गया। वक्ताओं ने कहा कि यह नियमावली आदिवासी समाज के दशकों के संघर्ष की जीत है। बैठक में उपस्थित नेताओं ने इसे ऐतिहासिक कदम बताते हुए सरकार का आभार व्यक्त किया।

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बैठक में वक्ताओं ने कहा कि पेसा कानून को लागू कराने के लिए माझी पारगना महाल, मनकी मुंडा और अन्य पारंपरिक स्वशासन प्रणालियों ने लंबा संघर्ष किया है। इस दौरान देश पारगना बाबा स्वर्गीय हरेंद्र नाथ मुर्मू के नेतृत्व में पूर्वी सिंहभूम से दिल्ली तक की पदयात्रा और राजघाट पर दिए गए धरने को याद किया गया। साथ ही डॉ. बी.डी. शर्मा, बंदी उरांव और दिलीप सिंह भूरिया जैसे अग्रणी नेताओं के योगदान की भी सराहना की गई। यह संघर्ष आदिवासी समाज की पहचान और अधिकारों को सुरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पड़ाव रहा।

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हालांकि आदिवासी समाज ने कैबिनेट के फैसले का स्वागत किया, लेकिन वर्तमान नियमावली में कुछ त्रुटियों को लेकर आपत्ति भी दर्ज कराई। समाज के अगुवाओं ने सरकार के समक्ष पाँच प्रमुख मांगें रखीं—पेसा कानून 1996 की मूल भावना का संरक्षण, ग्राम स्वशासन के अगुवाओं को मजिस्ट्रेट की शक्ति, ग्राम सभा को प्रशासनिक हस्तक्षेप से मुक्त कर स्वशासी शक्ति, पंचायती राज व्यवस्था का ग्राम सभा पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ना और ग्राम सभा की कार्यकारिणी बैठक में अधिकारियों का हस्तक्षेप न होना। बैठक के अंत में निर्णय लिया गया कि इन संशोधनों और आपत्तियों को लेकर जल्द ही एक प्रतिनिधिमंडल महामहिम राज्यपाल और मुख्यमंत्री से मुलाकात करेगा। इस बैठक में नवीन मुर्मू (देश परानिक बाबा), दिवाकर सोरेन, फकीर सोरेन, लखन मुर्मू, गणेश गागराई, सावन सोय सहित कई अन्य पारंपरिक स्वशासन व्यवस्था के अगुवा उपस्थित थे।

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