- मुहूलड़िहा गांव में श्रीमद् भागवत कथा के तृतीय दिवस ध्रुव चरित्र और प्रह्लाद भक्ति का वर्णन
पोटका : पोटका प्रखंड अंतर्गत कोवाली थाना क्षेत्र के मुहूलड़िहा गांव में श्री श्री राधा गोविंद भागवत सेवा संघ, दक्षिण पोटका की ओर से आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा भक्ति सह ज्ञान यज्ञ के तृतीय दिवस सोमवार को भक्ति और ज्ञान से ओत-प्रोत प्रवचन हुआ। कथा की शुरुआत शाम चार बजे भागवत भगवान की आरती, मंगलाचरण एवं संकीर्तन के साथ की गई। कथावाचक गोविंद दास शास्त्री जी महाराज ने उत्तानपाद के वंश में ध्रुव चरित्र की कथा का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने बताया कि सौतेली मां सुरुचि के अपमान के बावजूद माता सुनीति ने धैर्य और संयम नहीं खोया, जिससे परिवार एक बड़े संकट से बच सका। उन्होंने कहा कि परिवार और समाज को बचाए रखने के लिए धैर्य, सहनशीलता और संयम अत्यंत आवश्यक है।
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प्रह्लाद भक्ति और नरसिंह अवतार का भावपूर्ण वर्णन
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कथावाचक ने आगे ध्रुव की कठोर तपस्या द्वारा श्रीहरि को प्रसन्न करने की कथा सुनाते हुए कहा कि भक्ति के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती। हर माता-पिता को चाहिए कि वे अपने बच्चों को बचपन से ही भक्ति का अभ्यास कराएं, क्योंकि बाल्यावस्था कच्ची मिट्टी के समान होती है, जिसे जैसा चाहे वैसा आकार दिया जा सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि श्रीमद् भागवत में पाप से मुक्ति के लिए श्रेष्ठ उपाय के रूप में प्रायश्चित का उल्लेख किया गया है। कथा के दौरान हिरण्यकशिपु के अहंकार, भक्त प्रह्लाद की अटूट भक्ति, भगवान विष्णु के नरसिंह अवतार, हिरण्यकशिपु वध एवं प्रह्लाद की रक्षा का भावपूर्ण चित्रण किया गया। आयोजक मंडली द्वारा कथा के अनुरूप आकर्षक झांकियों का प्रदर्शन कर भक्तों को कथा के सार तत्वों से अवगत कराया गया, जिससे वातावरण पूरी तरह भक्तिमय बन गया।