जमशेदपुर: झारखंड राज्य आंगनवाड़ी कर्मचारी संघ के राज्य संयोजक जय प्रकाश पांडेय ने चुनावों में राजनीतिक दलों द्वारा जनता को मुफ्त रेवड़ियां बांटने की प्रथा पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पांडेय ने कहा कि इस तरह की मुफ्त वितरित योजनाएं जनता के लिए घातक साबित हो सकती हैं और इससे मतदाताओं का अपमान भी होता है।
जय प्रकाश पांडेय ने बताया कि आज के राजनीतिक दल मानकर चल रहे हैं कि केवल मुफ्त रेवड़ियां बांटकर ही मतदाताओं को अपने पक्ष में किया जा सकता है। उन्होंने इस प्रवृत्ति को राष्ट्र के लिए “बेहद खतरनाक नासूर” बताया। पांडेय ने उदाहरण देते हुए कहा कि बिहार में 1.5 करोड़ महिलाओं को सशक्तिकरण के नाम पर दस-दस हजार रुपये देने की योजना और विपक्षी दलों द्वारा प्रत्येक महिला को 2,500 रुपये प्रति माह देने की घोषणाएं इसी रणनीति का हिस्सा हैं।
पांडेय ने कहा कि आंगनवाड़ी केंद्रों में लगभग 50 वर्षों से गर्भवती महिलाओं, माताओं और नवजात बच्चों को पोषण देने वाली सेविकाएं, सहायिकाएं और एएनएम कठिन परिस्थितियों में काम कर रही हैं, लेकिन उन्हें आज तक राष्ट्रकर्मी या राज्यकर्मी का दर्जा नहीं दिया गया। सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट के निर्देशों के बावजूद राजनीतिक दल इसे नजरअंदाज कर रहे हैं।
जय प्रकाश पांडेय ने चेताया कि चुनावी रेवड़ियां बांटकर जीतना स्थायी नहीं हो सकता। इससे लोकतंत्र की गरिमा प्रभावित हो रही है और स्वस्थ राजनीति की संभावनाओं को खतरा है। उन्होंने देश के जागरूक नागरिकों से अपील की कि वे इस गिरती राजनीतिक व्यवस्था में सुधार के लिए मिलकर कदम उठाएं, नहीं तो लोकतंत्र को गंभीर नुकसान हो सकता है।
पांडेय ने स्पष्ट किया कि जनता को सतत जागरूक करना ही लोकतंत्र की असली शक्ति है, जबकि मुफ्त रेवड़ियों की राजनीति केवल अस्थायी लाभ देती है और देश के लोकतंत्र को कमजोर करती है।




















































