पोटका : झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति ने कहा कि राज्य में बांग्ला भाषा की शिक्षा व्यवस्था धीरे-धीरे समाप्ति के कगार पर पहुंचती जा रही है। इसका कारण राज्य गठन के 25 वर्ष बाद भी बांग्ला अकादमी का गठन नहीं होना है। उक्त आरोप समिति ने प्रेस वार्ता में लगाया। समिति के पदाधिकारियों ने कहा कि अविभाजित बिहार में बांग्ला अकादमी अस्तित्व में थी और वर्तमान में भी कार्यरत है। झारखंड राज्य के गठन से पूर्व हुई त्रिपक्षीय वार्ता में यह स्पष्ट निर्णय लिया गया था कि नवगठित राज्य में भी पूर्ववत नियमों को लागू किया जाएगा। इसके बावजूद, झारखंड में बांग्ला अकादमी की स्थापना आज तक नहीं हो पाई है।
हाल ही में, निरसा विधानसभा क्षेत्र के विधायक अरूप चटर्जी द्वारा विधानसभा में बांग्ला अकादमी के गठन की मांग उठाई गई। किंतु इस महत्वपूर्ण विषय पर राज्य सरकार की ओर से अब तक कोई ठोस प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है, जो अत्यंत खेदजनक है।
झारखंड में निवास करने वाले अनुमानित 1.3 करोड़ बांग्लाभाषी लोगों को उनकी मातृभाषा में सुगम एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से झारखंड बांग्लाभाषी उन्नयन समिति द्वारा एक व्यापक पहल की जा रही है। इस क्रम में राज्य के सभी जिलों में बांग्ला संगठनों एवं आम नागरिकों के साथ समन्वय स्थापित किया जाएगा।
इसी कड़ी में, झारखंड के प्रत्येक जिले में एक निर्धारित तिथि को संबंधित प्रखंड विकास पदाधिकारी के माध्यम से राज्य के मुख्यमंत्री महोदय को बांग्ला अकादमी के गठन की मांग को लेकर ज्ञापन सौंपा जाएगा। इसकी शुरुआत 11 अप्रैल 2026 को पूर्वी सिंहभूम जिले से किया जाएगा।
समिति राज्य सरकार से आग्रह करती है कि वह इस विषय की गंभीरता को समझते हुए शीघ्रातिशीघ्र बांग्ला अकादमी का गठन सुनिश्चित करे, ताकि बांग्ला भाषा और संस्कृति का संरक्षण एवं विकास संभव हो सके।
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