West Singhbhum: बाबा रत्नेश्वर शिव मंदिर में नंदी महाराज ने पिया दूध, श्रद्धालुओं का उमड़ा तांता

गुवा: किरीबुरू के हिलटॉप टाउनशिप स्थित बाबा रत्नेश्वर शिव मंदिर में महाशिवरात्रि की रात एक अद्भुत घटना घटी. मंदिर परिसर में स्थित नंदी महाराज की प्रतिमा द्वारा दूध ग्रहण करने की खबर फैलते ही भक्तों का हुजूम उमड़ पड़ा. सोशल मीडिया और मोबाइल फोन के माध्यम से यह खबर तेजी से वायरल हो गई और आसपास के क्षेत्रों से श्रद्धालु विशेष पात्रों में दूध लेकर मंदिर पहुंचे.

 

 

दूध अर्पण करते श्रद्धालु

भक्तगण अपने-अपने तरीके से नंदी महाराज को दूध अर्पित करने लगे. कोई चम्मच से तो कोई छोटे पात्र से दूध अर्पित कर रहा था. हर बार जब चम्मच में भरा दूध नंदी महाराज के मुख के पास ले जाया जाता, तो वह दूध तुरंत समाप्त हो जाता. इस चमत्कारी दृश्य को देखकर श्रद्धालु हैरान रह गए. उन्होंने इसे अपने मोबाइल कैमरों में कैद किया और कुछ ही समय में ये वीडियो और तस्वीरें सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं.

देर रात तक भक्तों की भीड़

महाशिवरात्रि के इस विशेष अवसर पर घटित हुई इस अद्भुत घटना ने भक्तों के मन में गहरी आस्था जगा दी. यह खबर आग की तरह पूरे क्षेत्र में फैल गई, जिसके बाद देर रात तक मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़ बनी रही. महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में लोग इस अलौकिक घटना के साक्षी बनने के लिए पहुंचे. मंदिर परिसर में “बोल बम” और “हर-हर महादेव” के जयकारे गूंजने लगे.

आस्था और विज्ञान, एक दिलचस्प चर्चा

नंदी महाराज की प्रतिमा द्वारा दूध ग्रहण करने की घटना ने क्षेत्र में हलचल मचा दी. वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इसे सतह तनाव (surface tension) और केशिका क्रिया (capillary action) के कारण होने वाली घटना माना जा सकता है. हालांकि, भक्त इसे भगवान शिव की कृपा और आस्था का चमत्कार मानते हैं. भले ही इस घटना के पीछे का धार्मिक या वैज्ञानिक कारण स्पष्ट न हो, लेकिन श्रद्धालुओं के लिए यह एक दिव्य अनुभव से कम नहीं था.
महाशिवरात्रि के दिन घटित हुई इस अनूठी घटना ने लोगों के विश्वास को और मजबूत कर दिया. नंदी महाराज को दूध अर्पित कर भक्तगण स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे. यह अलौकिक घटना बाबा रत्नेश्वर शिव मंदिर को और अधिक प्रसिद्ध बना गई है.

अगला सवाल: आस्था या विज्ञान?

अब यह देखना दिलचस्प होगा कि भविष्य में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से इस घटना की व्याख्या कैसे की जाती है. लेकिन फिलहाल यह क्षण श्रद्धालुओं के लिए एक आशीर्वाद से कम नहीं था.

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